क्या डिस्ट्रीब्यूटर्स अपना महत्व खो रहे हैं?

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प्लाइवुड-लैमिनेट समेत समूची वुड पैनल इंडस्ट्री में हमेशा से ही वितरकों (डिस्ट्रीब्यूटर्स) का वर्चस्व रहा है। किसी भी कंपनी के लिए अपने ब्रांड की सफलता सुनिश्चित करने के लिये डिस्ट्रीब्यूटर्स और उनके सेल्स नेटवर्क का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2001 में प्रकाशन की शुरुआत के बाद से ही प्लाई रिपोर्टर के सर्वेक्षणों में बिक्री में बढ़ोत्तरी के लिये बड़ी संख्या में शक्तिशाली, धनी और सुस्थापित वितरकों की मजबूत भूमिका देखने को मिली है, लेकिन 2018 के बाद हम देख रहे हैं कि कई निर्माता, वितरकों को नजरअंदाज करते हुए अपने उत्पादों को सीधे खुदरा विक्रेताओं (रिटेलर्स) को बेचने के बारे में बातें कर रहे हैं।

उक्त महत्वपूर्ण संदर्भ में ही प्लाई रिपोर्टर ने इस विषय पर एक इंटरएक्टिव और परस्पर प्रभावकारी आलेख तैयार किया है, जिसके लिये हमने इस इंडस्ट्री के अलग-अलग और शीर्ष स्तर के वितरकों की राय जानने का प्रयास किया। वितरकों से हमने जिस विषय पर संवाद स्थापित किया, उसका शीर्षक ‘‘क्या सीधे, खुदरा विक्रेताओं को प्राथमिकता देना, वितरकों की भूमिका को कम कर रही है?’’ था, जिस पर सभी ने बेबाकी से अपने विचार भी रखे। हमारा यह आलेख परस्पर प्रभावकारी और पूरी तरह बाजार पर आधारित है, जिसका प्रकाशन हम अगले कुछ महीनों और संस्करणों तक जारी रखेंगे, क्योंकि हम (प्लाई रिपोर्टर और बीएसएमआर) बाजार में हो रहे इस बदलाव का आधार, परिमाण और कारणों को खोजने के लिए गहन शोध और सर्वेक्षण कर रहे हैं। यह आलेख वुड पैनल निर्माताओं समेत इस इंडस्ट्री से जुड़े होलसेलर्स व रिटेलर्स जैसे उद्यमियों और संबंधित कंपनियों के लिये एक अभूतपूर्व व महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो सकता है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल प्रोड्कट सेगमेंट में किसी भी उत्पाद के ब्राण्ड की सफलता को सुनिश्चित करने के लिये वितरकों की भूमिका हमेशा ही महत्वपूर्ण और निर्णायक रही है। संपूर्ण बिल्डिंग मेटेरियल प्रोडक्ट कटेगरी मार्केट को देखते हुए वर्तमान समय में भी वितरकों की भूमिका काफी मजबूत है और यहां तक कि इसमें उनका वर्चस्व है। लेकिन अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बाजार में डिमांड-सप्लाई स्टेट्स में बदलाव के बाद, इस व्यवस्था को चुनौती दी जा रही है। प्लाई रिपोर्टर ने जहां भी बातचीत की, खास तौर पर प्लाइवुड और डेकोरेटिव लेमिनेट्स सेगमेंट के निर्माताओं के स्तर पर ये बात सामने आयी कि अब उनके महत्व और भूमिका पर अक्सर चर्चा की जाती है, जो कि पहले नहीं होती थी।

उक्त संदर्भ में निर्माताओं द्वारा दिया गया तर्क यह है कि वितरक की भूमिका केवल फाइनेंसर बनने तक सीमित हैं, जहां वे भुगतान और वॉल्यूम की सुरक्षा के लिए नियुक्त किए जाते हैं। निर्माता अक्सर टिप्पणी करते हैं कि वर्तमान परिदृश्य में, वितरक न तो वॉल्यूम उत्पन्न कर रहे हैं और न ही समय पर भुगतान कर रहे हैं। इसके विपरीत, कुछ उत्पादक ही ‘डारेक्ट रिटेलर’ मॉडल की वकालत करते हैं। उन्हें लगता है कि कई रिटेलर्स के पास अच्छी वित्तीय क्षमता है, जो पूरे ट्रक लोड को खरीद सकते हैं और प्रत्यक्ष खरीद से लाभान्वित हो रहे हैं। हालांकि यह केवल वही बातें है, जो वे महसूस करते हैं, इसलिये यह परिणाम नहीं है। परिणाम जानना और असर आना अभी बाकी है और उम्मीद है कि परिणाम का पता लगने में कुछ और साल लग सकता है।

उत्तर भारत में उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि के साथ अपनी संपूर्ण क्षमता का 60-70 फीसदी तक उपयोग करना, एक निर्माता के लिए काफी कठिन, और असंभव सा हो गया है। इसी के परणामस्वरूप निर्माता खुद को बाजार में विस्तारित करने के लिए कुछ अलग तरह की रणनीति और योजना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी रणनीति के तहत निर्माता, ऐसे खुदरा विक्रेताओं, जो वितरकों से खरीद रहे हैं, से सीधे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका उन्हें दशकों से इंतजार भी था। निर्माता जानते हैं कि वितरकों से उन्हें बेहतर मात्रा, कीमत और भुगतान नहीं मिल रहा है, लिहाजा सीधे खुदरा विक्रेताओं से जुड़ना ही ठीक है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निर्माताओं का रिटेलर्स से यह सीधा जुड़ाव एक सफलतम समझौता है?

बेहतरीन वित्तीय सक्षमताओं से युक्त कुछ उत्पादक (जिनकी संख्या बहुत कम है), अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ, अच्छी बिक्री टीम, व्यवस्थित कार्य संस्कृति, बेहतरीन प्रस्तुति और ब्रांड बिल्डिंग पर अधिक ध्यान देने जैसे नये उपायों के साथ कुछ दीर्घकालिक रणनीतियों की खोज कर रहे हैं और फिर अपने अगले समय में आर्किटेक्ट्स, इंटीरियर, कॉंट्रैकटर्स और ओईएम तक पहुंचने के लिए स्थिर योजना बना रहे हैं। जबकि कुछ निर्माता अपने उत्पादों को बेचने के लिए शॉर्टकट अपना रहे हैं और बिक्री मूल्य के मानकों या कतिपय नीति तंत्र का पालन किए बिना ही किसी को भी जैसे कि खुदरा विक्रेताओं या छोटे डीलरों या सेमी होलसेलर्स को अपने उत्पाद दे रहे हैं। इसके लिए बतौर प्लाई रिपोर्टर हम इसको ‘गोरिल्ला सेलिंग‘ की संज्ञा देते है, जिसके तहत एक निर्माता अपनी तत्काल आवश्यकता और लालच के अनुसार कार्य करता है। बाजार
की गतिशीलता में यह परिवर्तन विशुद्ध रूप से आपूर्ति से प्रेरित है और यह हर स्तर पर लाभ में अवरोध पैदा करने वाला है। ओवर सप्लाई के परिदृश्य ने सभी स्टेक-होल्डर्स की श्रृखंला को बाधित किया है और दशकों से प्लाइवुड उद्योग और व्यापार में बने हुए विश्वास को डगमगा दिया है। निर्माताओं के पास वितरकों पर निर्भर रहने का विकल्प नहीं है, इसलिए वे उन काउंटर्स या छोटे खुदरा विक्रेताओं की तलाश कर रहे हैं, जो उन्हें स्थायी बिक्री और मार्जिन दे सकते हैं, लेकिन यह भी बड़ा सवाल है कि क्या वास्तव में ऐसा हो रहा है?

बतौर प्लाई रिपोर्टर देश भर के सैकड़ों वितरकों से बातचीत (जो जारी है) करते हुए उन विक्रेताओं में भारी भय और सवालिया माहौल देखा गया जिनके बाजार में करोड़ों रुपये की उधारी के बराबर की सामग्री या मार्केट स्टॉक मौजूद है। बड़ा दृष्टिकोण यह भी था कि परिवर्तन हो रहा है लेकिन

यह किसी एक के लिए भी फलदायी नहीं होगा। अधिकांश वितरकों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि वे बाजार नेटवर्क से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं, वे कुछ उत्पादों के निर्माण और बिक्री में भी प्रवेश कर रहे हैं लेकिन उन्होंने ईमानदारी से यह वास्तविक प्रतिक्रिया व्यक्त की कि “तब खुदरा विक्रेताओं के लिये क्या होगा, जब हर महीने उनके करीबी काउंटर्स पर एक नया सप्लायर उत्पाद की कम कीमत की पेशकश के साथ पहुंचेगा?” भले ही वितरक इसे सुचारू रूप से चला कर रहे हों, लेकिन जब बाजार का चलन खुद के दम पर हो तो क्या अपेक्षाएं की जा सकती है? तेजी से बदलते इस परिदृश्य में प्लाई रिपोर्टर की टीम ने एक व्यापक सर्वेक्षण (जो जारी है) में अब तक पाया कि कोई भी सेगमेंट, इस बदलाव के लिए जिम्मेदार नहीं है, लेकिन ऐसी स्थितियों ने उद्योग और व्यापार को अपना व्यवसाय बनाए रखने के लिए अन्य तरह के नये विकल्पों को तलाशने और नये उपायों को ढूंढने के लिए मजबूर किया है। हमने यह भी पाया कि यदि आप लंबी अवधि की रणनीति मसलन उत्पाद की गुणवत्ता, टीम और ब्रांड निर्माण के साथ औपचारिक व्यावसायिक संस्कृति को स्वीकार करने की दृष्टि से योजना बनाते हैं, तो आपके दोनों मॉडल (वितरक या खुदरा विक्रेता) सफल हो सकता है।

डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी, किसी भी उद्योग के लिए बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है। बुद्धिमान लोग भी मार्केट में सही रास्ता खोजने के लिए पैसा, प्रयास और समय खर्च कर रहे हैं, लेकिन लालच निर्माताओं और अवांछनीय खुदरा विक्रेताओं को आपस में गठजोड़ करने के लिए प्रेरित कर रहा है, जो वर्तमान समय में बाजार में अशांति का बड़ा कारण बन रहा हैं। पेचीदगी से भरे मार्केट के इस नये चलन पर कुछ चुनिंदा लोगों की राय और विचार निम्नानुसार यहां प्रस्तुत की जा रही हैं।

इस बदलाव पर कुछ व्यापारियों की राय

"रिटेलर्स खुद मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं लेकिन वे बच नहीं पाएंगे। यह तीन से अधिक लेनदेन के बाद नहीं चल पाएगा। मेरे मामले में खुदरा विक्रेता उनके साथ कुछ लेनदेन के बाद मेरे पास वापस आ रहे हैं। अर्ध-थोक व्यापारी सीधे पहुंच रहे हैं जो पहले भी जाते ही रहते थे। यह थोक विक्रेताओं की गतिविधि को प्रभावित नहीं करती है। दक्षिण भारत में निर्माता इतने मजबूत नहीं हैं जो लम्बे समय तक उधार लेनदेन का बोझ उठा सकें। वे लंबे समय तक टिक नहीं सकते। आने वाले दिनों में यह बढ़ेगा, चैनल भागीदारों से बचकर काम करने से उपभोक्ताओं को फायदा होगा पर व्यापारी और निर्माता बुरी तरह प्रभावित होंगे।"  - Mr Naveen Poddar, Shyam Plywood, Bangalore

"वे दहशत में ऐसाकर रहे हैं, बाद में वे मुसीबत में पड़ जाएगे। जैसा वे अपेक्षा कर रहे वैसा वे भुगतान प्राप्त नहीं कर पाएंगे। अगर वे ऐसा करते हैं तो बाजार में उत्पाद की कीमतें भी गड़बड़ा जाएगी। तार्किक रूप से खुदरा विक्रेता निर्माताओं को थोक व्यापारी / वितरक की तरह समर्थन नहीं कर सकते। उन्हें पार्टियों को सप्लाई के लिए सावधान रहना चाहिए। अपनी ब्रांड इमेज के साथ कॉर्पोरेट सेगमेंट इस पर कायम रह सकता है लेकिन छोटे और मध्य सेगमेंट के प्लेयर्स को अपनी विश्वसनीयता बचाने के लिए थोक विक्रेताओं के पास वापस जाना होगा। निर्माताओं का यह रवैया बाजार ख़राब करने वाला है और अंततः उन्हें ही नुकसान होगा। उन्हें अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए और वितरकों के साथ आगे बढ़ना चाहिए।" - Mr Ritesh Singhvi, Vishal Plywood, Bangalore

"मुझे यह समझ में नहीं आता है कि अगर निर्माता सीधे खुदरा विक्रेताओं से संपर्क कर रहे हैं तो थोक विक्रेताओं / वितरकों का क्या होगा? मुझे लगता है कि वे कायम नहीं रह पाएंगे क्योंकि रिटेलर्स का सेलिंग मॉडल और प्रैक्टिस अलग हैं और उन पर थोक विक्रेताओं द्वारा भी हमला किया जाएगा। सभी स्टॉकहोल्डर समानांतर चलेंगे और उद्योग अलग दिशा में जाएंगे और अंततः निर्माता प्रभावित होंगे। उनका चैनल पार्टनर्स के साथ विश्वास भी खो जाएगा। खुदरा विक्रेता थोक विक्रेताओं के साथ प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं कर पाएंगे। वर्तमान में बाजार में आठ महीने का क्रेडिट है, जहां निर्माता यदि इस प्रवृत्ति को अपनाते हैं तो नहीं टिक पाएंगे। दूसरा, थोक विक्रेतो भी जीवित रहने के लिए उन्हें प्रतिस्पर्धा देने का रास्ता खोजेंगे।" - Mr Hemraj Jain, Bhandari Agencies, Hyderabad

"निर्माता इस तरह से लाभान्वित हो रहे हैं कि वे बेहतर मार्जिन हाशिल कर रहे हैं और अपने निचले स्तर के माल को भी खुदरा विक्रेताओं को सौंप दे रहे हैं। दूसरे वे भुगतान के स्तर पर भी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर निर्माताओं के साथ दो तीन नियमित लेनदेन के बाद कई काउंटर अपने वास्तिविक स्थान से गायब हो गए। मैं कहना चाहूंगा कि यदि वितरकों का चैनल मौजूद है तो वे छोटे लाभ के लिए ऐसा क्यों कर रहे हैं। छोटे प्लेयर्स के कारण ऐसा हो रहा है, जो किसी भी कीमत पर अपना उत्पादन बेचना चाहते हैं। यदि वे वितरकों के साथ बातचीत कर उनके साथ समझौता कर सही तरीके से आगे बढ़ें तो सभी को फायदा होगा।" - Mr Ritesh Patel, Gayatri Plywoods, Hyderabad

"आने वाला समय निर्माताओं या खुदरा विक्रेताओं का ही है, थोक विक्रेताओं का दायरा एक दिन समाप्त हो जाएगा। जीएसटी के कार्यान्वयन के साथ यह स्पष्ट था क्योंकि अब खुला बाजार है और हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार चैनल के अंत तक पहुंच सकता है। इस प्रवर्ति के कारण निर्माताओं के ओवरहेड मुसीबत में पड़ जाएगें क्योंकि यह खुदरा विक्रेताओं के दृष्टिकोण को लंबे समय तक नहीं झेल सकते है। मेरे विचार से निर्माताओं का पूँजी निवेश थोक विक्रेताओं के साथ सुरक्षित है क्योंकि वे डीलरों और खुदरा विक्रेताओं को जानते हैं लेकिन निर्माताओं के दृष्टिकोण ने हमें बड़े जोखिम वाले क्षेत्र में डाल दिया है। इस तरह थोक व्यापारी भी खुदरा बिक्री में परिवर्तित हो जाएंगे। मेरी राय में 100ः थोक बिक्री 60ः रहेगी और बाकी हिस्सा निर्माताओं को जाएगा। परिणामस्वरुप निर्माताओं को उनके द्वारा उठाए गए जोखिम का खर्च उठाना पड़ेगा और उनमें से कुछ लंबे समय तक सर्वाइव नहीं कर पाएंगे।" - Mr Sanjay Agarwal, Sai Ply, Hyderabad

"लंबे समय में निर्माताओं का बकाया उनके लिए परेशानी पैदा करेगा क्योंकि खुदरा विक्रेताओं के पास तरलता सीमित मात्रा में होती है। यह एक प्रवृत्ति है कि 100 खुदरा विक्रेताओं में से केवल 20 ही अच्छा लेन देन करते हैं लेकिन 50 से अधिक तरलता के स्तर पर मजबूत नहीं होते जो निर्माताओं को लंबे समय तक परेशान कर सकते है। इस प्रविर्ती के चलते भविष्य में डिस्ट्रीब्यूटर्स चैनल के काम काज में गड़बड़ी होगी। यह बहुत संभावित है कि उद्योग की गतिविधि मुश्किल में पड़ जाए। निर्माताओं को सतत विकास और विश्वास के लिए ऐसा नहीं करना चाहिए।" - Mr Ramawatar Khemka, Konarak Plywood, Chennai

"इसके दो कारक हैं; यदि उनके पास किसी विशेष क्षेत्र के लिए वितरक हैं, तो निर्माताओं को अपने साथ विश्वास भंग करने वाले चैनल भागीदारों को छोड़ कर खुदरा विक्रेताओं से संपर्क नहीं करना चाहिए। यह सब उनकी प्रतिबद्धता और समझौते पर निर्भर करता है। दूसरे, अगर निर्माताओं को वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं, तो स्वाभाविक रूप से उन्हें विकल्पों की तलाश करनी होगी। यह निर्माताओं के लिए फायदेमंद है लेकिन डीलरों और वितरकों को नुकसान होगा।" - Mr O P Tulsiyan, Novel Ply House, Bhuneshwar, Odisha

"यह उद्योग के लिए एक अच्छा संकेत नहीं है और थोक व्यापारी और वितरक चैनल से बाहर हो जाएंगे जो अंततः निर्माताओं के लिए ही हानिकारक होगा। अगर कोई भी सिस्टम में किसी भी चैनल को ओवरलैप किया जाता है तो यह पूरे स्टेक होल्डर्स को नुकसान पहुंचाता है। इससे यह भी प्रतीत होता है कि उद्योग सही दिशा में नहीं जा रहा है। अगर कोई असाधारण है और बदले हुए पैटर्न को अपना रहा है तो यह अपवाद होगा। लेकिन वर्तमान स्थिति में छोटे और मध्यम प्लेयर्स मजबूत ब्रांडों की नकल करते हुए उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वितरक भी अपने उत्पाद रेंज जैसे डब्ल्यूपीसी, एमडीएफ, यूपीवीसी, और विभिन्न डेकोरेटिव आइटम आदि से ऑफरिंग में विविधता ला रहे हैं और न्यूनतम लाभ पर काम करने के लिए तैयार हैं। लेकिन बाजार में मौजूदा मंदी निर्माताओं को यह प्रवृति अपनाने के लिए सहायक है लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चलेगी।" - Mr Bhavesh Shah, Jain Plywood, Chennai

"जीएसटी के बाद यह आसान हो गया है, लेकिन यह अंततः निर्माताओं को नुकसान पहुंचाएगा। वे सभी सटेकहोल्डर को लक्षित कर रहे हैं वास्तव में वे आर्किटेक्ट और इंटीरियर डिजाइनरों को भी लक्षित कर रहे हैं। खुदरा विक्रेता भी स्मार्ट होते हैं क्योंकि स्थानीय डीलर हमारे पेमेंट को रोकते हैं, लेकिन जब वे कंपनी के पास जाते हैं तो नकदी हाथ में लेकर और बुक्स के साथ जाते हैं। निर्माता सकारात्मक रूप से संभाल रहे हैं क्योंकि खुदरा विक्रेता उन्हें सीधे भुगतान करते है जबकि डीलर पेमेंट के मामले में अपटूडेट नहीं रहते। यह प्रवृत्ति छोटे निर्माताओं या प्लेयर्स के लिए सफल नहीं होगी जो ब्रांडिंग पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं, लेकिन बड़े प्लेयर्स को काफी सफलता मिलेगी।" - Mr Vivek Dhanuka, Agrawal Plywood, Aurangabad, Maharashtra

"इसके कारण बाजार में खलबली मची हुई है और थोक व्यापारी परेशान हैं। यह निर्माताओं की बढ़ती संख्या और बड़े उत्पादन के बाजार में आने के कारण हो रहा है। प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। यह चलन बढ़ेगा क्योंकि यूपी में और अधिक कारखाने लगेंगे। कंपनियां किसी भी कीमत पर ऑर्डर के लिए दबाव बना रही हैं। इससे निर्माताओं को नुकसान होगा क्योंकि वे अच्छे मार्जिन को आकर्षित नहीं कर पाएंगे। यदि उनका पेमेंट बाजार में अटक गया तो उन्हें उत्पाद में भी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस दृष्टिकोण से काउंटर भी बढ़ रहे हैं। भविष्य में निर्माताओं और वितरकों को स्थिरता के लिए कई बार सोचना होगा। यह निर्माताओं का स्थायी दृष्टिकोण नहीं है।" - Mr Shanitlal Jain, Kanifer, Pune 

"यह अच्छा है और इससे किसी को नुकसान नहीं है। प्लाईवुड निर्माताओं को नए खरीदार मिलेंगे। यह वितरक चैनलों को प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि आज कोई कॉन्स्टैंट प्राइस मेकनिजम नहीं है। आज ग्राहक भी  परिवर्तनीय हैं और अनुकूल दरों के साथ दूसरे के तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। निर्माता खुदरा क्षेत्र में भी गुणवत्तापूर्ण प्लेयर्स को इंटरटेन करने के लिए पर्याप्त रूप से स्मार्ट हैं। नकद भुगतान और क्रेडिट प्रणाली के लिए अलग-अलग तंत्र भी हैं तदनुसार उनके प्राइस बैंड बदलते हैं। निर्माता नकद भुगतान से खुश हैं क्योंकि बाजार कीमत के प्रति सचेत है। सभी सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है क्योंकि रिटेल में भी सभी सेगमेंट में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए, यह आगे और बढ़ेगा और बाजार बहुत अधिक प्रतिस्पर्धी होगा। यह उत्पाद एमआरपी के बिना है इसलिए यह भविष्य में बाजार के विस्तार के साथ आगे बढ़ेगा।" - Mr Rajesh Mutha, Shree Rajendra Distributors, Pune

"इसका मुख्य कारण अधिक उत्पादन पर है। आज लोग वितरकों की सही परिभाषा के साथ काम नहीं कर रहे हैं। आज के वितरक का रुझान यह है कि, वे मटेरियल प्राप्त करें और यह बाजार में फैल जाए, भुगतान प्राप्त करने के बाद उक्त मैन्युफैक्चरर्स की सेवा करें। इस तरह निर्माताओं को उनसे वास्तविक समर्थन नहीं मिल रहा है, जिसकी उन्हें उम्मीद है। निर्माताओं का दायित्व है कि वे समय पर पेमेंट और वॉल्यूम न मिलने पर विकल्पों की तलाश करें। निर्माताओं के पास सुविधाओं की तलाश करने का कोई विकल्प नहीं है क्योंकि उन्हें अपने कारखाने भी चलाने हैं। वे उन खुदरा विक्रेताओं से संपर्क कर रहे हैं जो उन्हें वित्तीय सहायता दे सकते हैं और उन्हें बाजार में बनाए रख सकते हैं। वितरकों को समझना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है। यदि उनका रवैया नहीं बदलता है तो प्रवृत्ति और आगे बढ़ना ही चाहिए।" - Mr Rajeev Agarwal, Asiatic Marketing, Mumbai

"इससे व्यापार गड़बड़ा जाएगा और सभी चैनल पार्टनर जैसे डीलर, वितरक, स्टॉकिस्ट आदि के अस्तित्व दांव पर लग जाएगा। यह व्यापार के लिए अच्छा नहीं है। आज मंदी है इसलिए कंपनियां खुदरा विक्रेताओं से संपर्क कर रही हैं, लेकिन अगर अच्छी मांग होगी तो वे उनसे संपर्क नहीं करेंगे और बीच में व्यापार चैनल परेशान होगा। भविष्य में यह निर्माताओं को नुकसान पहुंचाएगा क्योंकि मेडियम और लोअर सेगमेंट के प्लेयर्स आफ्टर सेल्स सर्विस नहीं दे पाएंगे। यह प्रवृत्ति लंबे समय तक नहीं रहेगी क्योंकि उपयोगकर्ता उत्पाद की गुणवत्ता से अनजान हैं और वे उद्योग के अन्य पेशेवरों जैसे कारपेंटर, डीलर, कांट्रेक्टर पर निर्भर हैं।" - Mr Hitesh Thakkar, Prince Ply Agency Pvt Ltd, Mumbai

"खुदरा विक्रेता खुद कारखानों में पहुंच रहे हैं। इससे थोक विक्रेताओं को नुकसान होगा। यह प्रवृत्ति विकसित हो रही है कि क्रेडिट विकल्प के लिए वे थोक विक्रेताओं के पास जाते हैं और नकदी खरीद के लिए कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं। आज रिटेलर्स के पास उन्हें भुगतान करने के लिए पर्याप्त ताकत हैं। वितरकों को अपने ऑफरिंग में वृद्धि करनी चाहिए और बिक्री की रणनीति को बदलना चाहिए ताकि एमडीएफ, विनियर और अन्य पैनल उत्पादों को अपनाने के साथ मूल्य वर्धित उत्पादों के लिए ग्राहकों से संपर्क किया जा सके।" - Mr Manoj Agarwal, Singhal Plywood, Ahmedabad 

"गलत तो गलत है! खुदरा विक्रेता स्थायी डिलीवरी के लिए नहीं कह सकते। हम यह समझा नहीं सकते हैं कि वे अंततः नुकसान में होंगे और उनका भुगतान अटक जाएगा क्योंकि खुदरा विक्रेता उनका साथ देने के लिए बहुत ताकतवर नहीं हैं। वितरक स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन उनके साथ खुदरा विक्रेताओं के संबंध प्रभावित होंगे। रिटेल सेगमेंट में मजबूत प्लेयर्स पहले से ही इस अभ्यास में निरंतरता से लगें हैं लेकिन छोटे प्लेयर्स को शामिल करने की मौजूदा प्रवृत्ति अंततः निर्माताओं के लिए हानिकारक होगी। मंदी के कारण इस प्रकार की स्थिति होती है, प्लेयर्स को चैनलों को बनाए रखने और आगे बढ़ने के लिए शांत और आश्वस्त होना चाहिए। पहले भी इस प्रकार की स्थिति हुई है, लेकिन पुरानी प्रथाओं पर वापस आ गए। यह मंदी का दौर लंबे समय तक चलेगा; लोगों को बेहतरी के लिए इसे डाइजेस्ट करना ही होगा।" -  Mr Indravadan Thakkar, Kalp Plywood Pvt Ltd, Ahmedabad

"अंततः उद्योग प्रभावित होगा क्योंकि वितरक समय पर भुगतान के मामले में उद्योग का समर्थन करने और उत्पादों के प्रबंधन और सेल्स में होने वाले उतर चढाव के बोझ उठाने के लिए मजबूत दावेदार हैं। रिटेलर्स का रवैया अलग है और वे कंपनी की नीति और उतार-चढ़ाव को सहन नहीं कर सकते हैं। शुरुआत में निर्माता इसका लाभ उठा सकते हैं लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चलेगा। यदि वे अच्छी सेवा देना चाहते हैं तो उन्हें वितरकों के मॉडल पर लौटना होगा।" - Mr Brijot Singh, Chawla Brothers, Jalandhar

"खुदरा विक्रेताओं या खरीदार में आज तकनीक और इंटरनेट के माध्यम से कम्युनिकेशन में आसानी के साथ जागरूक बढ़ी और अब वे बहुत जानकार हैं। प्रतिस्पर्धा में हर एक बेहतर मार्जिन चाहता है, इसलिए रेट का अंतर अधिक है, इसलिए खुदरा विक्रेता सीधे निर्माताओं के पास जा रहे हैं और मंदी के दौर के कारण वे इस समय उनको इंटरटेन कर रहे हैं। इसमें दोनों ही जीत की स्थिति में होते हैं क्योंकि एक को सस्ती दर मिलती है और दूसरे को चैनल पार्टनर्स को छोड़ देने के कारण बेहतर कीमत मिलती है। लेकिन, निर्माताओं के लिए ट्रेडिंग का प्रबंधन करना बहुत मुश्किल होगा। आर्चीटेक्ट्स और इंटीरियर डिजाइनर्स के स्तर पर यदि मटेरियल को वापस करना पड़ेगा तो वे कठिनाई में होंगे। यह विवाद भी पैदा करेगा और वितरकों और निर्माताओं के बीच विश्वास को समाप्त हो रहा है। यह प्रवृत्ति स्थानीय स्तर पर जारी रह सकती है लेकिन दूर के लिए वे परेशानी झेलने में सक्षम नहीं होंगे।" - Mr Dhanvant Singh, Samrat Plywood, Ludhiana

"यह उद्योग के लिए नया नहीं है और यह सर्वाइवल ऑफ़ दी फिटेस्ट के सिद्धांत के तहत आगे बढ़ेगा। क्षमता विस्तार के साथ अधिक उत्पादन क्षमता और नई इकाइयों के आने के कारण आज भौतिक आपूर्ति चरम पर है। मार्जिन बढ़ाने के लिए, निर्माता सीधे गुणवत्तापूर्ण खुदरा विक्रेताओं से संपर्क कर रहे हैं और तुरंत पेमेंट की उम्मीद कर रहे हैं। वे खुदरा विक्रेताओं की मानसिकता को नहीं समझते हैं। भविष्य में उन्हें पेशेवरों और कॉम्पिटिटर का एहसास होगा। इसके अलावा, उन्हें वितरकों के स्तर पर प्रभावित् करने के लिए बहुत समय देना होगा क्योंकि एक निर्माता वितरकों को पूरा रेंज नहीं दे सकता है। इस स्थिति में वितरक भी अपनी रणनीति बदल रहे हैं और ठेकेदारों, आर्चीटेक्ट्स और इंटीरियर डिजाइनरों के पास बाजार खोजने के लिए अपने दृष्टिकोण का विस्तार कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि निर्माता इससे लाभान्वित हो सकते हैं, लेकिन वे लाभान्वित होंगे या नहीं मुझे नहीं पता, लेकिन उनकी दिशा निश्चित रूप से मैन्युफैक्चरिंग से ट्रेडिंग में बदल जाएगी और अंततः उनके प्रयास व्यर्थ हो जाएगें।" -  Mr Anil Baweja, Raj Kamal Plywood, Delhi 

"मूल रूप से बाजार में ज्यादा मांग नहीं है, इसलिए निर्माताओं के लिए बाजार में बने रहने और अपने उत्पादन जारी रखने की आवश्यकता के चलते ऐसा हो रहा है। उनके इस दृष्टिकोण के कारण सिस्टम मिस-मैच हो गया है। उनका रिटेल दृष्टिकोण कीचड़ में फंसने जैसा है, लेकिन सर्वाइव करने के लिए कठिनाई में वे ऐसा कर रहे हैं। यह अस्थायी है और प्रमुख रूप से कमर्शियल प्लाईवुड में हो रहा है। वितरक भी इंटीरियर और विभिन्न सामग्रियों जैसे एमडीएफ आदि के पैनल के साथ उत्पाद विस्तार कर रहे हैं। " -  Mr Kailash Chander Sharma, Pushkar Plywood India (P) Ltd, Delhi

" यह अच्छा नहीं है क्योंकि यह चैनल को डिस्टर्व कर दिया जो अंततः उन्हें ही नुकसान पहुंचाएगा। खुदरा विक्रेता निर्माताओं को नहीं चला सकते हैं क्योंकि वितरक या थोक व्यापारी नियमित आधार पर बाजार की उदासीनता को प्रबंधित करने की क्षमता रखते हैं। एक बार बाजार जब स्थिर हो जाएगा और जब वे समस्या का सामना करेंगे तो वितरकों के पास वापस आएँगे। यह मंदी का एक प्रभाव है क्योंकि उद्योग दबाव में है और निर्माता स्थिरता के लिए नए विचार के साथ प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें करने दें! " -  Mr Pradeep Karnany, Manglam Timbers, New Delhi

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