कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से, कोविड के बाद पहली बार प्लाई-लैम कीमतें बढ़ेंगी

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अगस्त महीने के दूसरे पखवाड़े के बाद फेनाॅल की कीमतों में कथित तौर पर मजबूती आई है। केमिकल सप्लायर का कहना है कि बढ़ती मांग और थाईलैंड व अमेरिका से आयात पर एंटी डम्पिंग ड्यूटी की खबर से कीमतें बढ़ रही हैं। इस समय, फेनाॅल की कीमतों में 12 रुपये की वृद्धि हुई है, जिसे आगे भी बढ़ने का अनुमान है और या 62 से 65ध्- रूपये के स्तर तक पहुंचने के बाद कुछ समय के लिए कुछ स्थिरता देखी जा सकती है। दूसरी तरफ, इस अवधि के दौरान फॉर्मल्डिहाइड की कीमतें भी 20 फीसदी बढ़ी है।

यह तेज उछाल विशेष रूप से तब ज्यादा तकलीफदेह माना जा रहा है जब बाजार में तैयार उत्पाद की मांग उतना ज्यादा नहीं है। उद्योग के सूत्रों का कहना है कि कीमतों का यह छलांग अप्रत्याशित है क्योंकि इस अनुपात में मेथनॉल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं।

गौरतलब है कि फॉर्मल्डिहाइड, मेथनॉल का बाई प्रोडक्ट है। फॉर्मल्डिहाइड सप्लायर का कहना है कि मांग-आपूर्ति के अंतर के कारण कीमतें बढ़ी हैं, क्योंकि उत्तर भारत में फॉर्मल्डिहाइड की कई इकाइयां प्रदूषण के मानकों के अनुपालन के चलते बंद होने को मजबूर हैं। एनजीटी के आदेश के अनुसार, कई इकाइयों ने अपना उत्पादन बंद कर दिया है, और बाजार में औपचारिक आपूर्ति कम है। इस अवधि के दौरान मेलमाइन की कीमतों में भी मामूली वृद्धि दर्ज की गई है।

केमिकल की कीमतों का बढ़ना हाई प्रेशर लैमिनेट्स और प्लाइवुड की इनपुट कॉस्ट को प्रभावित कर दिया है। निर्माताओं का कहना है कि केमिकल की कीमतें व् लेवर की लागत और कम क्षमता उपयोग के कारण इनपुट कॉस्ट में वृद्धि हुई है। उनके बीच तैयार उत्पाद की कीमतें बढ़ने की चर्चा गर्म हो गई है और उनका कहना है कि सर्वाइव करने के लिए उन्हें कीमतबढाना ही होगा, नहीं तो भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

केमिकल के साथ-साथ क्राफ्ट पेपर की कीमतों में वर्तमान वृद्धि के कारण लेमिनेट के उत्पादक अधिक प्रभावित हैं। क्राफ्ट पेपर की कीमतों में भी पिछले 2 महीनों में अच्छी वृद्धि हुई है, हालांकि यह उम्मीद है कि उत्तर भारत में एक नया क्राफ्ट पेपर कारखाना आने से भविष्य में कीमतों में मामूली कमी आ सकती है। कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि लाइनर लेमिनेट्स उत्पादकों को बहुत प्रभावित करेगी, जो कोविड के बाद बहुत आक्रामक कीमतों पर उत्पाद की पेशकश कर रहे हैं।

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