प्लाइवुड मशीनरी की मांग में तेजी

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प्लाइवुड बाजार में प्रतिस्पर्धा और ओवर सप्लाई के बावजूद, भारतीय प्लाइवुड उद्योग से मशीनों की मांग जोरो पर है। विभिन्न स्तरों पर मशीनरी आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त जानकारी के निष्कर्ष बताते हैं कि प्लाइवुड मशीनरी निर्माता 4-5 महीने से पहले मशीनों की सप्लाई में सक्षम नहीं हैं। कुछ हॉटप्रेस, ड्रायर, इंप्रेग्नेटर और बॉयलर निर्माताओं ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए और मशीनों को डिलीवर करने में देरी होने पर सहमति जताई। दो प्रमुख हॉट प्रेस निर्माताओं ने नए आर्डर के लिए लगभग 6 महीने की प्रतीक्षा समय की पुष्टि की। लगभग 60 से 70 प्रेस की प्रतीक्षा सूचि के साथ, ब्रांडेड हॉटप्रेस सप्लायर पर ज्यादा दबाव है, और वे अगली डिलीवरी टाइम देने की स्थिति में नहीं हैं।

नई इकाइयों से आ रही मांग के कारण विभिन्न प्लाइवुड मशीनरी उत्पादकों के प्रतिनिधियों और इनके मालिक 2018 और 2019 दोनों वर्षों के लिए उत्साहित हैं। आने वाले प्लेयर्स की वजह से प्रतिस्पर्धा में वृद्धि को महसूस करते हुए पुरानी इकाइयां भी मशीन खरीदने की दौड़ में शामिल हो गई हैं। ऐसे प्लाइवुड उद्योग भी अपनी क्षमता का विस्तार कर रहे हैं और गुणवत्ता में सुधार के लिए वर्कफ्लो का आधुनिकीकरण कर रहे हैं, इसलिए अधिकांश प्लांट अब हॉटप्रेस, ऑटो लोडिंग और प्रीप्रेस लगा रहे हैं। अनुमानों के मुताबिक ऐसी 130 से 150 प्लांट और छोटी इकाइयां हैं, जो या तो अधिक प्रेस इनस्टॉल करा रही हैं या डेलाइट की संख्या बढ़ाने के लिए इसे बदल रही हैं। लोग अब छोटी जगहों में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए अपने ड्रायर और इम्प्रेग्नेटर्स को हाईस्पीड फीडिंग में बदल रहे हैं। वही उम्मीद रेजिन इम्प्रेग्नेटर्स से भी है जो अब हाई स्पीड में आ रही हैं इसलिए पुराने को बदला जा रहा है।

मशीनरी के आर्डर अब यमुनानगर, बरेली या लुधियाना तक सीमित नहीं हैं, इसके अलावा, इसके नए केंद्र बनते जा रहे हैं जहां मशीनों की मांग बढ़ रही हैं। उत्तरप्रदेश में लखनऊ, नजीबाबाद-बिजनौर और रामपुर बेल्ट; बिहार में पूर्णिया और किशनगंज; पंजाब में होशियारपुर और कई छोटे शहरों मे; तथा केरल में पेरमंबूर इत्यादि हैं। इसके साथ नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश में भी हॉटप्रेस की खरीद की सुचना लगभग सभी मशीन आपूर्तिकर्ताओं ने दी है। सैंडिंग, ग्लूइंग, केटल और बॉयलर मशीन सप्लायर्स के मुताबिक इस सेगमेंट के प्लेयर्स से हर महीने दर्जनों इन्क्वाइरी उनके पास आती हैं।

ऐसा माना जाता है कि प्लाइवुड मशीनरी की मांग अधिक है और अगले दो वर्षों तक रहेगी, हालांकि अनुभवी मशीनरी आपूर्तिकर्ताओं का अनुमान, कमजोर प्लेयर्स के अस्तित्व को लेकर इसके ठीक विपरीत है। वे वही बात दोहराते हैं कि ‘‘सबसे अच्छे और संगठित प्लेयर्स ही सर्वाइव कर पाएंगे।‘‘

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