अब नपेंगे नकली पीएफ 710 प्लाई बेचने वाले, हो सकता है जेल

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उपभोक्ता अब और अधिक शक्तिशाली हो गया है, क्योंकि उपभोक्ता संरक्षण कानून, 2019 को 20 जुलाई से लागू कर दिया गया है। नए कानून के अंतर्गत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) का प्रावधान है और उपभोक्ता विवादों के निपटारे के लिए मिलावट और भ्रामक विज्ञापनों के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ जेल भेजने जैसे सख्त दंड का भी प्रावधान किया गया है। नए कानून के अंतर्गत उपभोक्ता अब खरीददारी और सेवा प्राप्त करने के स्थान से दूर कहीं से भी शिकायत दर्ज कर सकता है। 

हरियाणा प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एचपीएमए) के प्रेसिडेंट श्री जेके बिहानी ने प्लाई रिपोर्टर से बात करते हुए कहा कि यह प्लाइवुड उद्योग के काम काज में भी और अधिक सुधर लाएगा। लेकिन, प्राधिकरण द्वारा अधिनियम को सभी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता होगी। उद्योग को भी इस बात का पूरा खयाल रखना चाहिए कि वे जो कह रहे हैं, उपभोक्ताओं को वही दिया जाना चाहिए। अगर गलत करने या झूठी स्टम्पिंग करने पर कोई भी इसे चुनौती देता है, तो उनके लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। 

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उन्होंने ये भी कहा कि नकली मोहर लगाने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। मैन्युफैक्चरर्स और ट्रेडर्स को केवल ब्रांड के अनुसार ही अपने उत्पाद की बिक्री करनी चाहिए। उदाहरण के लिए आईएसआई मार्क अब सामान्य हो गया है, जिनके पास नहीं है वे भी यह चिह्न लगा रहे हैं। यह गलत है, और बाजार में अस्वास्थ्यकर प्रतिस्पर्धा पैदा करता है। एसोसिएशन ने इसके प्रावधानों और परिणामों के बारे में निर्माताओं और व्यापारियों के बीच जागरूकता पैदा करने पर सहमति व्यक्त की है। धीरे धीरे जब इस कानून के अंतर्गत मामले आएँगे तो लोगों में जागरूकता बढ़ेगी तथा बाजार में उचित प्रोडक्ट मिलेंगे।

गौरतलब है कि प्लाइवुड बाजार में धडल्ले से बीआईएस मार्क का इस्तेमाल होने लगा है, जिसमें कई प्रोडक्ट, उन मानदंड़ों पर खरा नहीं उतरतें हंै। बाजार में नकली पीएफ 710 ग्रेड प्लाइवुड काफी तेजी से बिक रहा है, जिसमें प्लाई के उपर आईएसआई 710 का स्टाॅप लगा होता है। नए कानून लागू होने के बाद, इस तरह की गलत गतिविधियों पर रोक लगेगी, और ग्राहकों को उचित क्वालिटी का प्रोडक्ट मिलेगा, जो प्लाइवुड प्रोडक्ट के भविष्य के लिए बेहतर होगा। 

नए कानून के तहत जिला प्राधिकरण 1 करोड़ रुपये तक के मामले को देख सकता है, जो पहले 20 लाख रुपये था, जबकि राज्य प्राधिकरण 1 करोड़ रुपये से रु 10 करोड़ और राष्ट्रीय प्राधिकरण अब 10 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों की सुनवाई कर सकता है। जिला प्राधिकरण के फैसले के बाद राज्य स्तर में अपील करने वाले, विपरीत पक्ष को अब राज्य प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करने से पहले जिला प्राधिकरण द्वारा आदेशित राशि का 50 फीसदी जमा करनी पड़ेगी। राज्य प्राधिकरण को अपील दायर करने की सीमा अवधि 30 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दी गई है। साथ ही पक्षकारों को मध्यस्थता के माध्यम से विवादों को निपटाने की भी अनुमति दी जा सकती है।

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