मार्जिन व मूल्य सही है, तो हर मुश्किल में जीत होगी

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किसी भी व्यवसाय को आगे बढ़ने के लिए एक प्रभावी मूल्य निर्धारण जरूरी है - वैसा मूल्य निर्धारण जो प्रतिस्पर्धा के अनुरूप हो फिर भी अच्छा मार्जिन हासिल कर सकें, जैसा कि यह वुड पैनल इंडस्ट्री के कई ब्रांड के सफल संचालन की प्राथमिकता है। आज प्लाइवुड सेक्टर में, मूल्य निर्धारण इनपुट कॉस्ट के आधार पर नहीं, बल्कि प्रतियोगियों द्वारा तय की गई कीमत के आधार पर किया जा रहा है। कितना अजीब है! है की नहीं? यही कारण है कि विभिन्न उद्योग समूहों द्वारा की गई अपील का कोई खास असर नहीं हो रहा है।

हताशा में, ज्यादातर प्लाइवुड कंपनियां बेहतर स्टैंडिंग और ग्रोथ हासिल करने की उम्मीद में शटरिंग प्लाइवुड, डेकोरेटिव लेमिनेट, डोर आदि में स्विच कर रही हैं। और दुर्भाग्य से, उन सेगमेंट में भी ऐसा ही होने लगा है। ऐसी स्थिति में तथ्यात्मक रूप में कमजोर प्लेयर्स दरकिनार होते जा रहे हैं। कुछ ऐसे हैं जो इस तरह से मूल्य निर्धारण कर रहे हैं ताकि प्रतियोगियों को बाजार में आने से रोक सकें, अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ा सकें, या बाजार में अपना दबदवा बनाए रख सकें, लेकिन वे अक्सर यह भूल जाते हैं कि ‘बिजनेस और चैरेटी दो अलग अलग बातें हैं‘।

आज जब कमोडिटी और कच्चे माल के पूरे सेगमेंट ने 25 से 40 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई है, तो एक समझदार व्यापारी इस बोझ को क्यों पास ऑन ना करें और कीमतें ना बढ़ाए? प्लाइवुड सेगमेंट में, उत्तर मिलता है कि ‘‘हम ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि ऐसे में हम अपना बाजार ही खो देंगे।‘ ठीक है, पर वास्तव में यदि ऐसा नहीं करते हैं, तो आप बाजार में कब तक टिके रहेंगे? वैसे भी, जहां मार्जिन मिलता है वे सस्ते नहीं बल्कि ‘महंगे‘ आइटम होते है और ब्रांडेड अपनी साख और बाजार में विश्वास के साथ सप्लाई कैपेसिटी के बल पर आगे बढ़ते रहे हैं।

मैंने उद्योग में अपने 22 वर्षों के कार्यकाल में, अब तक कई तेज, और कॅल्क्युलेटिव लोगों को खेल से बाहर जाते देखा है। उस समय, उनमें से कई कमजोर प्लेयर नहीं दिखते थे। बाद में, जब मैंने विश्लेषण किया, तो स्पष्ट हो गया कि वे सभी गलत मूल्य निर्धारण के शिकार थे, जो प्रतिस्पर्धा के जाल में फंस गए थे। आज हम इतिहास को दोहराते हुए देख सकते हैं कि प्लाइवुड और लेमिनेट इंडस्ट्री में, 10 में से 6 प्लेयर्स के साथ बिल्कुल वैसा ही हो रहा है। ‘‘खराब मूल्य निर्धारण के चलते प्रतिस्पर्धात्मक जाल‘‘ में फसें हैं और अकुलाहट महसूस कर रहे है, फिर भी हकीकत से परे वे बहादुर दिखने की कोशिश कर रहे हैं।

बेशक, हमारे उद्योग के कई उपादों में ग्राहक सबसे पहले कीमत को ही नोटिस करता है। यह वास्तव में उनके खरीदारी में निर्णायक होता है लेकिन, यही आपके अस्तित्व और विकास को भी निर्धारित करता है। वर्तमान परिदृश्य में, प्लाइवुड फैक्ट्रियों के अधिकांश मालिक ग्रोथ और कमाई की बातें भूल रहे हैं, वे सिर्फ टिके रहने की कोशिश कर रहे हैं। कई मामलों में, यह भय और कमजोरी को साबित करता है, जो कंपनियों को इस मकड़जाल की ओर धकेल रहा है।

हमने कई बदलाव देखंे, जीएसटी के बाद, ओकूमे के आने के बाद, अब जब कैलिब्रेटेड प्लाई बाजार की रौनक बन गया है और एचडीएचएमआर एमडीएफ अब एक स्वीकृत केटेगरी है। इसलिए प्लाइवुड उद्योग और उद्योगपतियों को अपग्रेड, अपडेट और अपलिफ्ट करने की जरूरत है क्योंकि समय तेजी से निकलता जा रहा है। आज से 10 साल बाद, ये बड़े प्लांट सभी औपचारिकता निभाते हुए स्टैण्डर्ड ग्रेड और थोक खरीददारों द्वारा संचालित होंगे और समय के साथ यह एक हकीकत होगा। मेरा मानना है कि उस स्तर तक पहुंचने के लिए, सही मूल्य निर्धारण की गणना करने, सही तरीके से बाजार बनाने और सही मार्जिन रखने की जरूरत है। नहीं तो, जॉब वर्क का विकल्प चुनना होगा और धीरे-धीरे गुमनामी में डूब जाएंगे।

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