थिन एमडीएफ के आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी से घरेलू उद्योग उत्साहित

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भारत सरकार द्वारा हाल ही में पांच देशों से 6 मिमी से नीचे के एमडीएफ बोर्ड के आयात पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने के निर्णय से घरेलू एमडीएफ बोर्ड उत्पादकों को काफी मदद मिलने की उम्मीद जगी है। कुछ देशों से भारत में सस्ते डंपिंग के चलते उत्पादन प्रभावित हो रहा था, घरेलू उद्योग को तरजीह देने की बात जोर पकड़ रही थी। भारतीय एमडीएफ मैन्युफैक्चरर्स ने इस निर्णय को आवश्यक बताया, जो आगे चलकर अन्य थिकनेस केटेगरी में भी काफी राहत प्रदान करेगा और विकास के नए रस्ते खोलेगा।

गौरतलब है कि, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने घरेलू उद्योग को बचाने के लिए इंडोनेशिया, श्रीलंका, वियतनाम, मलेशिया और थाईलैंड से एमडीएफ के सब्सिडाइज्ड आयात पर पांच साल तक एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की है। जारी अधिसूचना के अनुसार, घरेलू उद्योग सब्सिडी वाले आयात से बुरी तरह प्रभावितहुए थे और उनके हितों की रक्षा के लिए यह निर्णय लिया गया है।

प्लाई रिपोर्टर से बात करते हुए, शिरडी इंडस्ट्रीज लिमिटेड के एमडी श्री राकेश अग्रवाल ने कहा, “अन्य देशों में, पार्टिकल बोर्ड और एमडीएफ मैन्युफैक्चरिंग को उनके देश की सरकारों द्वारा एग्रो-फॉरेस्टरी के सहायक उद्योगों के रूप में बढ़ावा दिया जाता है, जो लोगों की आय बढ़ाने के साथ-साथ वहां वन क्षेत्र भी बढ़ाते हैं। इसलिए इन देशों में उत्पादित पार्टिकल बोर्ड/एमडीएफ जैसे उत्पादों को वास्तव में सब्सिडी दी जाती है और यह भारत में सस्ते हो जाते हैं। हमारे देश में, दुर्भाग्यवश पार्टिकल बोर्ड और एमडीएफ फारेस्ट आधारित उत्पाद माना जाता है, जिसे कोई सहयोग नहीं मिलता, इसीलिए उनके सस्ते डंपिंग से बचाने के लिए, भारतीय उत्पादकों ने इसकी मांग की।‘‘\

श्री राकेश अग्रवाल ने कहा कि इस कदम को बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था क्योंकि थिन एमडीएफ बोर्ड का मामला थिक एमडीएफ केटेगरी से अलग नहीं है। 6 मिमीसे अधिक थिकनेस वाली केटेगरी में, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड आदि के विभिन्न कंपनियों पर पहले से ही एंटी डंपिंग ड्यूटी लागू है, जो एक निश्चित स्तर से कमपर ही बेचते हैं, और यही बात 6 मिमी सेगमेंट पर भी लागू  होती है। पहले 6 मिमी पर एक प्रोविजनल एंटी-डंपिंग ड्यूटी थी, लेकिन बाद में जब इसे फिर से सक्रिय नहीं कि गई तो निश्प्रभावी हो गई। यह कदम तब प्रभावी होगाजब वित्त मंत्रालय कुछ हफ्तों में इसे नोटिफाई कर देगी।

थिन एमडीएफ के एक प्रमुख प्लेयर, पाॅयनियर पैनल प्रोडक्ट्स के एमडी श्री ललित गुप्ता कहते हैं कि यह घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए एक बहूप्रतीक्षित कदम है क्योंकि भारत में थिन एमडीएफ का उत्पादन करना और सस्ते डंप लॉट के खिलाफ बेचना बिल्कुल भी संभव नहीं था। हमने सस्ते आयात के कारण इस सेगमेंट में काफी घाटा उठाया था, फिर भी इसे जारी रखा, लेकिन एंटी-डंपिंग वैल्यू के प्रभाव के बाद, भारतीय उत्पादकों के पास सस्ते आयात के खिलाफ लड़ाई शुरू करने और उससे मुकाबला करने का मौका मिलेगा। इस पर टिप्पणी करते हुए, एक बड़े इम्पोर्टर ने बताया कि कई कंपनियां जो एक निश्चित मूल्य से नीचे सस्ता आयात कर रही थीं, वे प्रभावित होंगी, लेकिन जो कंपनियां पहले से ही एक स्तर पर बेच रही हैं, उनको कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और भारत में कीमतें अभी भी स्वीकार की जाएंगी और व्यवहार्य रहेगा।

इस पहल के लिए आवेदन ग्रीनपैनल इंडस्ट्रीज लिमिटेड, सेंचुरी प्लायबोर्ड (इंडिया) लिमिटेड और रूशिल डेकोर लिमिटेड ने किया था। इस पर कार्रवाई करते हुए मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है। डीजीटीआर ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि शुल्क लगाने की सिफारिश सब्सिडी मार्जिन और घरेलू उद्योग द्वारा किए जा रहे नुकसान के बराबर है। उन्होंने अपने जांच में पाया कि इन देशों से सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि आयात अधिक होती है।

वर्तमान में, लगभग 6 कंपनियां हैं जो थिन एमडीएफ का उत्पादन कर रही हैं, और बड़े स्तर पर घरेलू जरूरतों को पूरा कर रही हैं। प्रस्तुत किये गए आकड़ों के अनुसार, घरेलू उद्योग में थिन एमडीएफ की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त उत्पादन क्षमता है। इसके अलावा कई नई कंपनियां भी इस केटेगरी में आ रही हैं, जबकि मौजूदा कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार भी कर रही हैं।

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