दक्षिण भारत का प्लाइवुड उद्योग - क्या कहता है केरल?

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उत्तर भारत को जहां वुड पैनल ट्रेड के ड्राइवर के रूप में जाना जाता है, वहीं दक्षिण उनका पूरक है। आज भारत में कोविड की दूसरी लहर है, प्लाई रिपोर्टर ने दक्षिण भारत के लोगों के विचार जानना चाहा और ई-कॉन्क्लेव ‘द वॉयस फ्रॉम साउथ इंडिया - क्या कहता है केरल?’ का आयोजन किया जिसे स्टार प्लाइवुड मशीनरी का साथ मिला और यह 30 मई, 2021 को प्लाई रिपोर्टर फेसबुक पेज पर लाइव प्रसारित किया गया। वेबिनार के दौरान दक्षिण भारत क्या महसूस करता है, इस पर एक सफल और आकर्षक चर्चा हुई। केरल में 400 से अधिक प्लाइवुड मैन्युफैक्चरिंग यूनिटें हैं जो मुख्य रूप से इकोनॉमिकल ग्रेड प्लाइवुड का उत्पादन करती हैं, इसके साथ ही 4 पार्टिकल बोर्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिटें, हजारों सॉ मिल हैं। केरल के प्लाइवुड और पैनल महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बाजारों के साथ साथ पूरे दक्षिण भारत में बिकता है।

ई-कॉन्क्लेव में एम एम मुजीब रहमान, प्रसिडेंट, एकेपीबीएमए, केरल श्री जी. विष्णु प्रसाद, निदेशक, कृष्णा ग्रुप, जोस चाको, एमडी, डेल्टा प्लाइवुड एंड बोर्ड्स; श्री टी के सलीम, एमडी, ग्रीनलैंड पार्टिकल बोर्ड्स प्राइवेट लिमिटेड; श्री मोहम्मद फैसल वी, एमडी, ओजोन एलवाईएफ प्राइवेट लिमिटेड; श्री इब्राहिम के एम, चेयरमैन, के-बोर्ड प्लाई और मुअददीन अहमद, एमडी, पॉजिटिव चिप बोर्ड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड उपस्थित थे। 

केरल स्थित वुड पैनल इंडस्ट्री पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से काफी संघर्ष कर रही है, लेकिन प्लेयर्स का मनोबल कम नहीं हुआ; लगातार बढ़ा ही है। वे सभी बाधाओं को पार कर आगे बढ़ रहे है। 2016 में नोटबंदी हुआ, 2017 में जीएसटी लागू किया गया, 2018 में केरल में बाढ़ आई जिसने मैन्युफक्चरर्स को काफी नुकसान पहुंचाया, 2019 में फिर से बाढ़ आई और काफी तबाही हुई, विशेष रूप से पेरंबबूर क्षेत्र में, और 2020 में कोविड और 2021 में इसकी दूसरी लहर की मुश्किलों से सामना कर रहे है। वेबिनार के दौरान उनकी समस्याओं और उनके संभावित समाधान, बाजार, व्यापार और डीलरों तथा बाकी उद्योग से उनकी अपेक्षाओं पर चर्चा की गई। प्रस्तुत है इस परिचर्चा के प्रमुख अंश।

तमाम चुनौतियों के बावजूद अप्रैल-मई महीनों में स्थिति कैसी रही?

इब्राहिम के एमः अप्रैल में, ज्यादा दिक्क्तें नहीं थी क्योंकि लॉकडाउन 1 मई, 2021 से शुरू हुई, तब हमारी मुश्किलें बढ़ी, क्योंकि लॉकडाउन की घोषणा के बाद 50 फीसदी से ज्यादा लेवर घर चले गए और हमारा उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ। कोविड की परेशानियों के बीच सरकार की ओर से कोई सहयोग नहीं है। ईएसआई, पीएफ, बिजली के साथ हमारा सभी खर्च बरकरार है।

मोउददीन हमीदः एर्नाकुलम में ट्रिपल लॉकडाउन जैसी स्थिति है  और पूरी औद्योगिक गतिविधियां ठप हो गयी। लकड़ी की कटाई बंद है, लेकिन प्लाइवुड और पार्टिकल बोर्ड की फैक्ट्रियों ने अभी भी लेवर को अपने खर्च पर रोक रखा है। पहले कोविड के बादहम बैंकिंग की दिक्क्तों का सामना कर रहे हैं, क्योंकि मोरेटोरियम था पर ब्याज में कोई छूट नहीं थी। दूसरे लॉकडाउन के बाद दिक्कतें और बढ़ गई क्योंकि खर्च तो लगातार हो ही रहा है।प्लाइवुड और पार्टिकल बोर्ड में भी स्थिति ऐसी ही है। पार्टिकल बोर्ड, प्लाइवुड मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर होते हैं और यदि प्लाइवुडमैन्युफैक्चरिंग बंद होता है तो पार्टिकल बोर्ड भी प्रभावित होता है।

जी. विष्णु प्रसाद: भले ही सरकार कह रही हो कि मैन्युफैक्चरिंगकर सकते है लेकिन लेवर की कमी के कारण काम नहीं हो रहा है। यह पूरी तरह से लॉकडाउन जैसा ही है और काम लगभग 2 फीसदी ही चल रही है। मुझे लगता है कि जुलाई तक रिकवरी नहीं हो पाएगी क्योंकि कच्चे माल की बढ़ती लागत के साथ इनपुट कॉस्ट बढ़ती जा रही है।

टी के सलीमः केरल में, मई में लॉकडाउन था। कच्चे माल की उपलब्धता एक समस्या है क्योंकि लकड़ी के लॉग नहीं हैं क्योंकि पेड़ की कटाई नहीं हो रही है। उम्मीद है पेड़ की कटाई के साथ प्लाइवुड और पार्टिकल बोर्ड के उद्योग भी थोड़ा सहज होंगे। बीच-बीच में मेडिकल और ग्लब्स इंडस्ट्री ने अपने बॉयलरों के लिए रबर वुड को दोगुनी कीमत पर खरीदा। इसलिए, लकड़ी की कीमतें सामान्य से दोगुनी हो गई थी पर मेडिकल एक्सेसरीज की कीमतें कम रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप के बाद अब रबर वुड की कीमत में कमी आई है।

उम्मीद है कि कुछ हप्तों में उपलब्धता सामान्य हो जाएगी। बेशक हमें महाराष्ट्र से और एक्सपोर्ट्स के कुछ ऑर्डर मिल रहे हैं, कुल मिलाकर जून के अंत तक सब सामान्य हो जाना चाहिए। केरल का उद्योग पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है और वे लॉकडाउन में हैं। दूसरी तरफ उत्तर भारत का परिदृश्य अलग है और वहां 30 से 35 फीसदी उत्पादन हो रहा है। कुछ कंपनियां जो बहुत अच्छा कर रही हैं वे लगभग 80 से 90 प्रतिशत उत्पादन कर रहीं हैं।

आगे की चुनौतियां

टी के सलीमः पिछली बार किसी के पास कोई स्टॉक नहीं था और अचानक पूरी चीज खुल गई थी, तो बाउंस बैक होना ही था। लेकिन, इस बार स्थिति अलग है, उत्तर भारत के लोगों के पास स्टॉक हो सकता है क्योंकि वहां थोड़ा बहुत काम चल रहा है।मोहम्मद फैसल वीः केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में प्लाइवुड की कई दुकानें नहीं खुली हैं। कुछ दुकानें सख्त सरकारी नियमों के तहत खुले हैं। इसलिए फैक्ट्री चलने पर भी हम नहीं बेच पा रहे हैं. लेवर और कच्चा माल उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें चलाने का कोई मतलब नहीं है।

जी. विष्णु प्रसादः दक्षिण में लॉकडाउन बहुत सख्त है, इसलिए लेवर व अन्य चीजों के होने के बाद भी कंपनी फैक्ट्री नहीं चल पा रही है। दूसरे हमारे पास दैनिक बाजार है और हम केवल एक या दो दिनों के लिए लकड़ी खरीदते और स्टॉक करते हैं। तो जाहिर है हम टिम्बर उपलब्धता नहीं होने के कारण फैक्ट्री नहीं चला पा रहे हैं।

एम एम मुजीब रहमानः सभी मजदूर यहां हैं क्योंकि मालिकों ने कहा कि वे उनकी देखभाल करेंगे। वे उन्हें सारा खर्च दे रहे हैं। प्लाइवुड के पेमेंट और ऑर्डर की कोई दिक्कत नहीं है। भविष्य में भी हम अच्छे ऑर्डर की उम्मीद कर रहे हैं लेकिन फैक्ट्री ठीक से नहीं चला सकते क्योंकि हमें कच्चे माल की कमी है। कोविड और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स में गड़बड़ी के कारण कच्चा माल उपलब्ध होने में दिक्कत है। लॉजिस्टिक अभी भी ठीक नहीं हो पाया है, जिससे इनपुट कॉस्ट बढ़ गया है। फेस विनियर औररेजिन में लगभग 40 फीसदी कीमतें बढ़ी। लकड़ी की कीमतों में 25 फीसदी और लेवर कॉस्ट में 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसी तरह प्लाईवुड और पार्टिकल बोर्ड मैन्युफक्चरिंग में 30 फीसदी उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसलिए सर्वाइव करने के लिए उत्पाद की कीमत 30 फीसदी बढे़, तो ही हम बिना नुकसान के फैक्ट्रियां चला सकते हैं। आर्डर है लेकिन हम उस स्तर तक कीमत नहीं बढ़ा सकते हैं यही समस्या है। यहां मानसून शुरू हुआ तो लकड़ी के दाम फिर बढ़ेंगे।

जोस चाकोः फिनोल और फॉर्मेलिन की कीमतें बढ़ गई हैं। फेस विनियर के रेट 3 से 4 रुपये प्रति वर्ग मीटर बढ़ गई हैं। इसी तरह फेस विनियर और लेवर की भी भारी कमी है।

मोउददीन हमीद: मुझे लगता है कि लॉकडाउन खुलने के बाद बाजार में पार्टिकल बोर्ड में थोड़ी मंदी आएगी क्योंकि पहले लॉकडाउन के दौरान इम्पोर्ट कम था पर दूसरी लहर के बाद डर दर के बावजूद आयात बढ़ रहा है। दूसरी बात इस बार भारत में लॉकडाउन है, पर अन्य देशों में उत्पादन जारी है।

मोहम्मद फैसल वीः निश्चित रूप से, केरल की आय मुख्य रूप से एनआरआई पर आधारित है और वे भी इस कोविड में बुरी तरह प्रभावित हैं क्योंकि यह न केवल भारत बल्कि मध्य पूर्व और यूरोप भी प्रभावित है। ऐसे में लोग निवेश करने से काफी डर रहे हैं। उनमें से कइयों को अस्पतालों में बहुत पैसा खर्च करना पड़ा। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं कि अचानक सब कुछ छिन गया, इसलिए उत्पाद की अच्छी मांग के साथ प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए जो भी खर्च हो, उसे बाउंस बैक करने की पूरी सम्भावना है। 

फेस विनियर और रेजिन मेंलगभग 40 फीसदी कीमतें बढ़ी। लकड़ी की कीमतों में 25 फीसदी और लेवर कॉस्ट में 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसी तरह प्लाईवुड और पार्टिकल बोर्ड मैन्युफक्चरिंग में 30 फीसदी उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसलिए सर्वाइव करने के लिए उत्पाद की कीमत 30 फीसदी बढे़, तो ही हम बिना नुकसान के फैक्ट्रियां चला सकते हैं। आर्डर है लेकिन हम उस स्तर तक कीमत नहीं बढ़ा सकते हैं यही समस्या है।

लेकिन मुझे लगता है कि यह एक साल बाद जरूर प्रभावित करेगा क्योंकि स्टील और सीमेंट की कीमत अपने उच्चतम स्तर पर है। तो, इस समय कंस्ट्रक्शन धीमा है और एक साल बाद ही हमारे उत्पाद का उपयोग किया जाएगा।

केरल किफायती प्लाइवुड मैन्युफैक्चरिंग के लिए जाना जाता है, तो अगर इनपुट कॉस्ट बढ़ रही है तो बाजार से आपकी क्या उम्मीदें है?

एम एम मुजीब रहमानः हम ज्यादा उम्मीद नहीं कर रहे हैं लेकिन उत्पाद की कीमत में कम से कम 30 फीसदी की वृद्धि होनी चाहिए, अन्यथा धीरे धीरे सभी प्लाइवुड इंडस्ट्री एक-एक करके बंद हो जाएगा। अगर हालत ऐसा ही रहा तो निश्चित रूप से इसका असर उद्योग पर पड़ेगा। मुझे लगता है कि अगले छह महीने या एक साल तक हम फिर से संघर्ष करेंगे।

मोहम्मद फैसल वीः हम काफी ज्यादा बैंक इंटरेस्ट दे रहे हैं,इसलिए स्वाभाविक रूप से धनाढ लोग भी पीड़ित हैं। दूसरे, हम उत्पादकता के बिना मजदूरी का भुगतान कर रहे हैं। हम ईएसआई और पीएफ का भुगतान कर रहे हैं और सरकार से कोई सहायता नहीं मिल रही है। इसलिए, प्लाई रिपोर्टर के इस मंच पर, हम सरकार से वेतन, ईएसआई और पीएफ, जीएसटी और बैंक इंटरेस्ट के मामले में हमारा सहयोग करने का अनुरोध करते हैं। अगर हमें यह मिलता हैं तो रिवाइव करने के कुछ मौके मिलेंगे।

मोउददीन हमीद: ऐसा नहीं है कि केरल में केवल किफायती प्लाइवुड ही बनाया जाता है। पेरंबबूर में गुणवत्ता में बहुत सुधार हुआ है। हम लगातार समस्याओं का सामना कर रहे हैं, इसलिए, यदि हमें ऊंची लागत के साथ उत्पाद की कीमत में 40 फीसदी की वृद्धि नहीं मिलती है तो हम सरवाइव नहीं कर पाएंगे।

जोस चाकोः हम आजकल लेवर की भारी कमी देख रहे हैं और इसके लिए पेमेंट अधिक करना पड़ रहा है इसलिए हमें आधुनिक उपकरणों और मशीनरी के साथ तकनीकी रूप से एडवांस होने की जरूरत है। हमारे लिए चुनौती सरकारी विभागों से अनुमति लेने की है। इसके लिए कई लिमिटेशन हैं, इसलिए एसोसिएशन के स्तर पर निश्चित रूप से हमें सरकार से बात करनी होगी। तब ही हम दूसरे राज्यों से मुकाबला करने की स्थिति में होंगे। हमने कई बार एसोसिएशन के स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है।

हमें क्रेडिट की सुविधा मिली हुई थी, लेकिन अब वे एडवांस मांग रहे हैं या वे जीरो क्रेडिट पॉलिसी अपना रहें हैं। अब हम अपने  सप्लायर को बहुत ज्यादा पेमेंट करने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए डीलरों को आगे आना चाहिए और मौजूदा स्थिति में हमारा साथ देना चाहिए।

तमाम चुनौतियों के बावजूद क्या केरल प्लाइवुड उद्योग से कोई उम्मीद है?

जोस चाकोः कोविड अगले तीन या चार सालों तक रहने वाला है, भविष्यवाणी यहीं कहती है, समय-समय पर कई लहरें आती रहेंगी। इसलिए, हमें स्थिति से निपटने के लिए नए तरीके तलाशने होंगे। मैं इस शानदार आयोजन के लिए प्लाई रिपोर्टर को बधाई देना चाहता हूं।

टी के सलीम: हम मानते हैं कि हम स्थिति के साथ तेजी से अनुकूलित होते है इसलिए हमने उन सभी बाढ़ों और अब कोविड की कई लहरों के साथ लड़ाई लड़ी है। तो हम लड़ते रहेंगे, देखते हैं कितनी लहरें उठती हैं। मुझे लगता है कि भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल है।

केरल अपने छोटे सेटअप के साथ भी हमेशा अच्छा काम करता रहा है। यहां की मुख्य लकड़ी रबर वुड और युकली है। इसके अलावा, वे विभिन्न देशों से मेटेरियल काआयात करते रहे हैं। तमाम बाधाओं के बावजूद यह इंडस्ट्री क्लस्टर 150 यूनिट से बढ़कर 400 तक पहुंच गया है। संभावनाएं बहुत हैं लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी बहुत हैं। डिमांड के संदर्भ में देखें तो कोविड ने कई परिवारों को परेशान किया है, इसलिए उसके लिए अनिश्चितता रहेगी।

इब्राहिम के एमः बढ़ती इनपुट कॉस्ट के साथ हमारा अस्तित्व मुश्किल में पड़ता जा रहा है। आने वाले तीन से छह महीने बहुत कठिन हैं। हम सरकार से अनुरोध करना चाहते हैं कि मोरेटोरियम दें और उतने दिनों का ब्याज माफ कर दंे।

जी. विष्णु प्रसादः जिन घरों में हमारे प्लाइवुड का उपयोग होता है, वे रेडीमेड फर्नीचर में शिफ्ट हो जाएंगे क्योंकि अब वे नहीं चाहते कि कोई कारपेंटर उनके घर में आए। हम इससे कैसे निपटेंगे, यह भी हमें बहुत महंगा पड़ने वाला है।

निष्कर्ष

केरल में अब लॉकडाउन में ढील दी गई और उम्मीद है कि बाजार खुलते ही मांग बढ़ेगी और स्थिति में सुधार होगा। केरल में लेवर उपलब्ध है, और पूंजी की उपलब्धता भी है, लेकिन लॉकडाउन के चलते मैन्युफैक्चरिंग ठप था। केरल में मानसून भी आ गया है जो लॉकडाउन के बाद एक और चुनौती है। निश्चित रूप से यह भी वुड पैनल उद्योग के उत्पादन को प्रभावित करेगा। ऐसे में प्लाइवुड मैन्युफैक्चरिंग में दिक्कत होने पर पार्टिकल बोर्ड का उत्पादन भीप्रभावित होगा। इसलिए केरल में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसा लग रहा है कि बाजार खुलने के बाद कीमतें बढ़ना तय है, लेकिन नकदी में काम काज  बढ़ेगी।

केरल अपने छोटे सेटअप के साथ भी हमेशा अच्छा काम करता रहा है। यहां की मुख्य लकड़ी रबर वुड और युकली है। इसके अलावा, वे विभिन्न देशों से मेटेरियल का आयात करते रहे हैं। तमाम बाधाओं के बावजूद यह इंडस्ट्री क्लस्टर 150 यूनिट से बढ़कर 400 तक पहुंच गया है। संभावनाएं बहुत हैं लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी बहुत हैं।

डिमांड के संदर्भ में देखें तो कोविड ने कई परिवारों को परेशान किया है, इसलिए उसके लिए अनिश्चितता रहेगी। इतना ही नहीं तीसरी लहर का भी अनुमान लगाया जा रहा है जो जुलाई-अगस्त या दिसंबर में आ सकती है, इसलिए इसका एक ही उपाय है सभी नागरिकों को जल्द से जल्द टीकाकरण किया जाए। आने वाले दिनों में केरल निश्चित रूप से अच्छा करेगा क्योंकि ये पहले फिल्म फेस सेक्टर में भी अच्छा प्रदर्शन किया है और गुणवत्ता में सुधार किया है। लेकिन, कुछ महीनों से उनकी मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। केरल से खरीदारी करने वाले निश्चित रूप से उनकी बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट और कठिनाइयों को समझते हुए सहयोग करने का प्रयास करेंगे। वेबिनार में उपस्थित पैनल का कहना था कि इंडस्ट्री सर्वाइव करने की स्थिति में नहीं है और वे आगे बढ़ने के लिए व्यापार से सहयोग चाहते हैं अन्यथा क्षमता वृद्धि, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन आदि की कोई संभावना नहीं है। सरकार की ओर से राहत पाने के लिए एसोसिएशन को अन्य निकायों जैसे फिप्पी, एआईपीएमए आदि के सहयोग से महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

एक तरफ जहां उत्तर भारत सकारात्मक बातंे कर रहा है, बड़े प्लेयर बाउंस बैक और हालात तेजी से ठीक होने की बात कर रहे हैं, केरल की स्थिति निराशाजनक दिख रही है। लेकिन, केरल का भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में जबरदस्त योगदान है जो देश को इस संकट के समय में मजबूती प्रदान कर रहा है। इस वेबिनार का उद्देश्य उद्योग जगत को केरल की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना और साथ मिलकर आगे बढ़ना है।

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