अस्थिर फेस विनियर बाजार पर विश्वसनीयता का खतरा!

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2014 में बर्मा से लॉग निर्यात पर प्रतिबंध के बाद, भारतीय प्लाइवुड उद्योग के लिए फेस विनियर की खरीददारी काफी मुश्किल अभी हल होती नहीं दिख रही है। लगातार आपूर्ति मिलने, स्टैण्डर्ड थिकनेस, सही क्वालिटी और कीमतों में स्थिरता के लिए उद्योग अब तक संघर्ष कर रहा है। भारतीय प्लाइवुड निर्माता फेस विनियर प्राप्त करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं क्योंकि यह प्लाइवुड बनाने का एक महत्वपूर्ण घटक है और क्वालिटी, लुक और टच के लिए यह वैल्यू ऐडिशन भी करता है। भारतीय उधमियों ने म्यांमार, लाओस, वियतनाम, इंडोनेशिया और गेबॉन जैसे स्थानों पर विदेशों में कई उपक्रमों में बहुत पैसा निवेश किया है। फिर भी उद्योग के पास फेस विनियर का कोई उपयुक्त या टिकाऊ स्रोत नहीं है, जहां उन्हें सस्ती कीमतों पर लगातार अच्छी गुणवत्ता पूर्ण मेटेरियल के सप्लाई का भरोसा मिल सके।

मैट प्लाई की मैन्युफैक्चरिंग का बढ़ता चलन फेस विनियर के प्रतिस्थापन के रूप में एक और विकल्प उपलब्ध है क्योंकि वर्तमान चुनौतीपूर्ण समय में उद्योग फेस विनियर की कीमतों पर 4 रुपए प्रति वर्गफुट इनपुट कॉस्ट से अधिक लगाना नहीं चाहता। इंडस्ट्री प्लेयर्स सोचते हैं कि फेस विनियर खरीदने के लिए ज्यादा निवेश नहीं करना चाहिए और मेक इन इंडिया के अंतर्गत विकल्प की तलाश करनी चाहिए, जो कि सस्ती, उपयुक्त और टिकाऊ हो।

पिछले 7 वर्षों में, भारतीय प्लाइवुड उद्योग अपनी उत्पादन क्षमता में लगभग 40 फीसदी की वृद्धि के साथ तेजी से ग्रोथ किया है। इसी हिसाब से फेस विनियर की खपत भी बढ़ी है। लेकिन उनके पास इसकी खरीद का कोई निश्चित समाधान नहीं है, और उद्योग अब तक कम से कम दो दर्जन किस्मों के फेस विनियर उपयोग करने को मजबूर हैं, जो पहले मुश्किल से 6 से 7 ग्रेड तक सीमित थे। उद्योग को गर्जन, केरुइंग, पीएनजी, सोलोमन, ओकूमे, रिकॉन, क्राफ्ट पेपर, मेलामाइन पेपर और बहुत कुछ मिलता रहा, लेकिन यह भी आश्चर्य की बात है कि उनमें से कोई भी उद्योग की जरूरत और स्टैण्डर्ड के अनुसार ‘स्थिर और सर्वश्रेष्ठ‘ टैग के साथ उपलब्ध नहीं है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उद्योग में फेस विनियर के थिकनेस के स्टैंडर्डाइजेशन का स्पष्ट अभाव है, जो एक और बड़ी चुनौती है। इस प्रकार फेस विनियर की मोटाई कम होते जाने के साथ फेस का उपयोग करना बेकार होता जा रहा है। उपलब्ध थिकनेस से कुछ भी मजबूती नहीं मिलती यहां तक कि इससे इसकी सुंदरता में भी कोई बड़ा अंतर नहीं आता और ये बीआईएस के मानक को भी पूरा नहीं करते हैं। बढ़ती कीमतों के साथ, सप्लायर फेस विनियर की क्वालिटी और थिकनेस कम कर रेट घटाते हैं, जिसके चलते उद्योग रेकॉन विनियर, क्राफ्ट पेपर्स और मेलामाइन पेपर्स जैसे अन्य विकल्पों की तलाश करने को मजबूर है।

मैट प्लाई की मैन्युफैक्चरिंग का बढ़ता चलन फेस विनियर के प्रतिस्थापन के रूप में एक और विकल्प उपलब्ध है क्योंकि वर्तमान चुनौतीपूर्ण समय में उद्योग फेस विनियर की कीमतों पर 4 रुपए प्रति वर्गफुट इनपुट कॉस्ट से अधिक लगाना नहीं चाहता। इंडस्ट्री प्लेयर्स सोचते हैं कि फेस विनियर खरीदने के लिए ज्यादा निवेश नहीं करना चाहिए और मेक इन इंडिया के अंतर्गत विकल्प की तलाश करनी चाहिए, जो कि सस्ती, उपयुक्त और टिकाऊ हो।

अगस्त 2021 के इस अंक में एक दूरदर्शी व्यवसायी और यूनिप्लाई ब्रांड के पूर्व संस्थापक श्री बी एल बेंगानी द्वारा भारत में एनएफसी बोर्ड के रूप में अपनी नई परियोजना की सफलता की कहानी को कवर किया गया है, जो उन लोगों के लिए एक सीख है जो इनोवेशन और क्वालिटी में विश्वास करते हैं। मोरबी, गुजरात के सबसे पुराने ब्रांड रियल टच लेमिनेट्स के निदेशक श्री कांति पटेल के साथ बातचीत भी उद्योग और व्यापार की आंखें खोलने वाली है। इसके अलावा, इस अंक में कच्चे माल की कीमतों में हालिया वृद्धि से तैयार उत्पादों के रेट में बढ़ोतरी के करण से संबंधित बहुत सारी खबरें, और कई अन्य समाचार, प्रोडक्ट लॉन्च, इवेंट और बहुत कुछ शामिल किया गया है। मैं आशा करता हूं कि आगे आप का समय अच्छा हो!
 

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