भारत में आयातित पाइन लाॅग की कीमत 25 प्रतिशत गिरी

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बढ़ते दबाव और तमाम तरह की अटकलों के बीच पाइन टिम्बर की उपलब्धता को लेकर एक अच्छी खबर आ रही है। भारत में पाइन लॉग की कीमतें 25 फीसदी तक गिर जाने की सूचना है। रिपोर्टके अनुसार, जून महीने की शुरुआत में पाइन लॉग्स की कीमतें 165 डॉलर प्रति क्यूबिक मीटर के आसपास रही थीं, लेकिन जुलाई महीने में इंपोटर्स ने इसे 120 डॉलर प्रति क्यूबिक मीटर के हिसाब से रेट देना शुरू कर दिया। आयातकों का कहना है कि उन्हें यूक्रेन और कुछ अन्य देशों से किफायती मूल्य पर पाइन लॉग की अच्छी मात्रा मिली है, इसलिए वे इसे इन्ही कीमतों पर भारतीय सॉ मिलर्स को प्रदान कर रहे हैं। इस रूझान को दखते हुए न्यूजीलैंड के साथ अन्य देशों के इंपोटर्स ने इसे कम कीमत पर रेट दिया है, और जुलाई महीने के अंत में ये कीमतें धीरे-धीरे 25 प्रतिशत तक गिर गयी। कांडला स्थित सॉ मिलर्स के अनुसार, आने वाले महीने में कीमतों में और कमी आएगी और यह 100-110 रूपये के स्तर पर पहुंच जाएगी। जून महीने में, कांडला बंदरगाह को 1.37 लाख क्यूबिक मीटर पाइन लकड़ी प्राप्त हुई, जिसकी मात्रा जुलाई महीने में बढ़कर 1.87 लाख क्यूबिक मीटर तक हो गयी।

पाइन की नरम कीमतों से टिम्बर, प्लाइवुड, रियल एस्टेट क्षेत्र में पाइन टिम्बर का उपयोग करने वालों को एक बड़ी राहत मिली है। भारत में लकड़ी आधारित उद्योगों में टीक, मरांती और गर्जन के बाद पाइन सबसे अधिक स्वीकृत और व्यापक तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली टिम्बर प्रजाति है। भारत में कंस्ट्रक्शन एंड रियल एस्टेट सेक्टर और पैकेजिंग इंडस्ट्री में पाइन टिम्बर की भारी मात्रा में खपत होती है। इसके अलावा फर्नीचर और प्लाइवुड क्षेत्र में भी इसका उपयोग किया जाता है।

प्लाई रिपोर्टर के आकलन के मुताबिक, भारत हर महीने लगभग दो लाख क्यूबिक मीटर या इससे अधिक की पाइन टिम्बर की खपत करता है। कुल लाग्स या सॉ टिम्बर के आयात में पाइन टिम्बर की बाजार में हिस्सेदारी करीब आधी होती है। अधिक निर्भरता और व्यापक स्वीकृति के कारण विश्व के पाइन ट्रेड्रस और सप्लायर्स के लिए भारत एक प्रमुख बाजार है। भारत के पाइन टिम्बर बाजार में न्यूजीलैंड महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि न्यूजीलैंड भारत में इंपोर्टेड पाइन के कुल बाजार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखता हैं।

पाइन लॉग की कीमतों में गिरावट कांडला बेस्ड प्लाई-बोर्ड और डोर्स उत्पादकों के लिए एक अच्छी खबर है, क्योंकि इससे वे ब्लॉक-बोर्ड और फ्लश डोर जैसे तैयार उत्पादों की पेशकश आसानी से कर सकेंगे, जो उत्तर भारत की तुलना में किफायती हो सकते हैं। पैकेजिंग और पैलेट इंडस्ट्री में भी इसके नरम मूल्य के आधार पर एक नई आशा का संचार हुआ है। प्लाई रिपोर्टर का मानना है, अगले छह महीनों में पोपलर ब्लॉक-बोर्ड और पाइन बोर्ड्स के बीच केवल 3- 5 प्रतिशत की लागत का अंतर रह जायेगा, जो पोर्ट्स के पास स्थित कई प्लाइबोर्ड उद्योगों के लिए राहत की खबर हो सकती है।

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