मई के दौरान प्लाइवुड का उत्पादन 25 फीसदी ही रहा

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प्लाई रिपोर्टर के सर्वे और विश्लेषण के अनुसार विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में, 4 मई से 31 मई तक, प्लाइवुड मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों ने अपनी औसतन उत्पादन क्षमता का महज 20 फीसदी ही उपयोग कर पाया है। प्लांट में मौजूद एक तिहाई मजदूरों के साथ अधिकांश प्लांट में एक शिफ्ट में ही काम हुआ। इकाइयां मई के दौरान अपने परिसर के अंदर जारी प्रक्रिया में एक शिफ्ट में प्लांट चलाने के साथ अपने मेटेरियल का ही उपयोग कर सकी हैं। यह भी देखा गया कि 20 मई के बाद केवल आधे प्लाइवुड इकाइयां ही चल सकी हैं। बड़े पैमाने पर लेवर के पलायन के चलते कई प्लांट ने कथित तौर पर उत्पादन बंद कर दिया है।

संगठित क्षेत्र में, प्रमुख प्लाइवुड बनानें वाली कंपनियां अभी भी अपने कुल मासिक उत्पादन की आधी क्षमता पर काम कर रही हैं। वैसे ब्रांड जिनकी भारत में दो से अधिक संयंत्र हैं उन्होंने लेवर की मौजूदगी के बावजूद सभी यूनिट में उत्पादन शुरू नहीं किया है। इसके विपरीत, संगठित और बेहतर प्रबंधित कंपनियां अपने लेवर को रहने और मैन्युफैक्चरिंग में मदद करने के लिए राजी करने में सक्षम रही हैं, जबकि असंगठित इकाइयों में बहुत कम श्रमिक बचे हैं।

हरियाणा, पंजाब, केरल, गुजरात आदि से प्रवासी मजदूरों के पलायन के कारण, मई का महीना कोविड के पहले उपलब्ध कुल संख्या का बमुश्किल 22-25 फीसदी बचा है। अकेले यमुनानगर में 50 प्रतिशत से अधिक प्लांट बंद हैं, और चलने वाले संयंत्र आंशिक रूप से चलाने के लिए कई सेगमेंट के साथ एक शिफ्ट में काम कर रहे हैं। यूपी, बिहार, झारखंड, बंगाल आदि में स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लेवर की स्थानीय उपलब्धता के कारण तुलनात्मक रूप से 25-25 फीसदी के साथ बेहतर स्थिति में देखा जा रहा है। औसतन, मुश्किल से 24-25 प्रतिशत ही मैन्युफैक्चरिंग मई के महीने में दर्ज किया गया। यदि बाकी लेवर अपने अपने घरों के लिए निकलते रहे तो यह आंकड़ा और गिर सकता है, जैसा कि विभिन्न निर्माताओं ने आशंका व्यक्त की हैं।

प्रवासी मजदूरों और कुशल कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कच्चे माल की उपलब्धता भी समान रूप से प्रभावित हुई है। जून के महीने में प्लाईवुड की मांग समान स्तर पर होने की उम्मीद है, जो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में क्षमता उपयोग का निर्धारण करने का एक और कारण है। यह अनुमान है कि मांग में थोड़ी वृद्धि होगी पर लेवर का आगे पलायन होना जून में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में प्रॉफिट मार्जिन को कम कर देंगे।

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