कच्चे माल की लागत बढ़ने से एमडीएफ की कीमत 5 फीसदी बढ़ी

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एमडीएफ की कीमतों में कंपनी और उत्पाद के ग्रेड के अनुसार 5-6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। एमडीएफ बनाने वाली कंपनियां प्रमुख कच्चे माल जैसे लकड़ी, केमिकल और लॉजिस्टिक की कीमतों में तेज वृद्धि के बाद कुछ महीनों से कीमतें बढ़ने की घोषणा का मूल्यांकन कर रही थीं। प्री-लेमिनेटेड एमडीएफ कैटेगरी में कीमतों में वृद्धि वास्तव में 7 से 8 फीसदी से ऊपर है, जिसका कारण प्रिंटेड डेकॉर पेपर और डेकॉर पेपर सेगमेंट में मूल्य वृद्धि है। प्लाई रिपोर्टर ने पाया कि हर एमडीएफ ब्रांड जैसे ‘एक्शन टेसा, ग्रीनपैनल, सेंचुरी प्रोवुड, पायनियर पैनल, क्रॉसबॉन्ड, आदि ने जनवरी 2021 के पहले सप्ताह से कीमतों में वृद्धि की घोषणा की है। बाजार में मांग की तुलना में कम आपूर्ति के कारण नई कीमतों की स्वीकृति भी तुरंत हो गई। सर्दी के मौसम की शुरुआत के साथ कच्चे माल में वृद्धि और लकड़ी में मौजूद बहुत अधिक नमी के अलावा मिथनॉल, फॉर्मल्डिहाइड और मेलमाइन की ऊंची कीमतें उत्पादकों के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ाने में महत्वपूर्ण भुमिका निभाती है। खरीददारों को लगता है कि मूल्य वृद्धि का प्रमुख कारण, ‘आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक होना है।

इस वर्ष जून-जुलाई में ‘एंटी डंपिंग‘ की शुरुआत के बाद कई बार कीमतें बढ़ाने का अनुमान लगाया गया था, जिससे भारतीय निर्माताओं को इस केटेगरी के लिए कुछ क्षमता उपयोग बढ़ाने में मदद मिली। एमडीएफ का शिपमेंट जरूरत से कम आने से भारत स्थित एमडीएफ उत्पादकों को मदद मिली क्योंकि कोविड के बाद, कंटेनर फ्रेट तीन गुना होने से नेट लैंडिंग कॉस्ट काफी nबढ़ गई, जो फिजिबल नहीं रहा।

बाजार के अनुसार, एमडीएफ निर्माता नए नियमों और शर्तों के अनुसार ऑर्डर ले रहे हैं, और रोज के हिसाब से कीमतों पर विचार कर रहे हैं। बाजार के लोगों का कहना है कि एमडीएफ में यह एक नया चलन देखा जा रहा है जो स्टील या अन्य कमोडिटी की तरह ही है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक प्लाई रिपोर्टर दावों का सत्यापन नहीं कर सका है। डिस्पैच के दिन, सप्ताह या दिनों के आधार पर नई दर की पेशकश इसलिए की जा रही है क्योंकि वे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण अपने इनपुट काॅस्ट में कितनी वृद्धि होगी, इसके बारे में नहीं जानते हैं।

प्लाई रिपोर्टर के विश्लेषण के अनुसार, एमडीएफ की मांग के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का उपयोग पिछले 4 महीनों के दौरान अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है। आजकल मांग को पूरा करने के लिए लगभग सभी इकाइयां अपनी अधिकतम संभव क्षमता का उपयोग कर रही हैं, जिसके बाद देश में एमडीएफ प्लांट लगाने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

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