प्लाईवुड हमेशा चलेगा, क्वालिटी व सेल पर फोकस रखे

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हर कोई पार्टिकल बोर्ड और एमडीएफ की बात कर रहा है, साथ ही लोगों के बीच एक अवधारणा पैदा होती जा रही है कि प्लाइवुड का भविष्य सवालों के घेरे में है। यूरोप और अन्य विकसित देशों की तरह, यहां भी माना जा रहा है कि प्लाइवुड की बाजार हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम हो जाएगी। एक दर्जन से ज्यादा प्लाइवुड उत्पादक उत्तर भारत में पार्टिकल बोर्ड मैन्युफैक्चरिंग को लेकर आकलन के काम में जुटें हैं, और वे यात्रा प्रतिबंध हटने के बाद चीन जाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्लाई रिपोर्टर के अनुसार, यदि यात्रा पर रोक हटती है तो, भारत में अगले वर्ष तक तकरीबन 200 सीबीएम प्रति दिन क्षमता वाली लगभग 10-12 पार्टिकल बोर्ड लाइनें और लग जाएगी।

अगर कोई अपने व्यवसाय में विविधता लाने या उसका विस्तार करने जा रहा है, तो यह सोच सही है, लेकिन अगर किसी को लगता है कि भारत में प्लाइवुड की मांग कम होने जा रही है, और पार्टिकल बोर्ड या एमडीएफ इसकी जगह ले लेगा, तो उन्हें तथ्यों को ठीक करने की जरूरत है। भारतीय ग्राहक, प्लाइवुड के बदले दूसरे उत्पाद को स्वीकार नहीं करते हैं और प्लाइवुड को केवल प्लाइवुड से ही प्रतिस्थापित किया जा सकता है, ना कि कोई अन्य वैकल्पिक उत्पाद द्वारा!

दूसरे वैकल्पिक उत्पादों से प्लाई को प्रतिस्थापित करने की बात होती है, लेकिन उनकी यांत्रिक और भौतिक गुणों को प्लाइवुड से बेहतर बताने के लिए तथ्यों पर बात करना होगा। पार्टिकल बोर्ड और एमडीएफ की कीमतें प्लाइवुड के नजदीक जरूर पहंुच गई हैं, लेकिन इनके यांत्रिक गुण और यूजर विहेवियर के चलतेइसकी स्वीकार्यता अभी भी प्लाइवुड जैसी नहीं है।

पार्टिकल बोर्ड और एमडीएफ की अपनी विशेषताएं, फायदें और अप्लीकेशन हैं, जो इन उत्पादों के ग्रोथ में मदद कर रहा है। निश्चित रूप से यह प्लाइवुड की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि आयात पर निर्भरता कम करने, और सप्लाई में सुधार होने के कारण परिस्थितियां इसे बढ़ने में मदद कर रही हैं। फिर भी प्लाइवुड की मांग बरकरार है, और यह आगे भी बढ़ेगा। आज भारत में, कैलिब्रेटेड प्लाइवुड के उत्पादन के लिए आधुनिक मशीनरी और प्रौद्योगिकी के साथ लगभग 5 दर्जन प्लाइवुड मैन्युफैचरिंग प्लांट स्थापित किए जा चुकें हैं, और फर्नीचर सेक्टर में भारी मांग को देखते हुए 50 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को उच्च तकनीक वाली उत्पादन प्रणाली में बदलने की प्रक्रिया जारी है। बाकी प्लाइवुड प्रतिष्ठानों को आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने के बारे में सोचना चाहिए, जो गुणवत्तापूर्ण कैलिब्रेटेड प्लाइवुड का उत्पादन कर सके। यदि क्वालिटी बनाएंगे, तो वैकल्पिक उत्पादों से उन्हें ज्यादा चुनौती नहीं मिलेगी।

इस मार्च अंक में ऑस्टिन प्लाइवुड के निदेशक श्री निशांत अग्रवाल के साथ बातचीत समेत कई मार्केट रिपोर्ट, कच्चे माल के कीमतों की चुनौतियां, प्रोडक्ट लॉन्च आदि प्रकाशित की गई है। तकनीकी लेख, डिस्ट्रीब्यूटर्स और डीलर्स के विचार समेत कई खबरों को कवर किया गया है।

सभी को एक समृद्ध वित्तीय वर्ष 2021-22 की शुभकामनाएं!

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