एनजीटी के फॉर्मल्डिहाइड यूनिटें बंद करने के आदेश से प्लाइवुड इंडस्ट्री में हड़कंप

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एनजीटी द्वारा 3 जून को दिए आदेश में पर्यावरण मंजूरी (ईसी) नहीं रखने वाले इकाइयों को बंद करने की बात से प्लाइवुड और पैनल इंडस्ट्री में हाहाकार मच गया है। जल्द ही फॉर्मल्डिहाइड की कई इकाइयां बंद होने और सप्लाई लाइन प्रभावित होने की आशंका है। आदेश में कहा गया है कि 2006 के बाद स्थापित वैसी इकाइयां जिनका पर्यावणा मंजूरी नहीं ली गई है उन्हें बंद कर दिया जाए। अपने 28 नवम्बर 2019 के आदेश में एनजीटी द्वारा कई इकाइयों को 6 महीने तक बिना ईसी चलने की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि दो महीने के अंदर उन्हें इसके लिए आवेदन करना होगा। अदालत का कहना है कि चूंकि पर्यावरण मंजूरी एक वैधानिक जरूरत है, इसलिए इसका पालन किया जाना चाहिए। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसपर पर्यावरण मंत्रालय सहित संबंधित रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा योग्यता और कानून के अनुसार विधिवत विचार किया जाएगा, लेकिन वैधानिक आदेश के अनुपालन तक, इकाइयों को कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

एनजीटी के इस आदेश के बाद, नार्थ इंडिया के प्लाइवुड उत्पादकों में हडकंप मच गया है, क्योंकि आदेश आने के दो दिन के अंदर फार्मल्डिहाइड के रेट में भारी उछाल देखने को मिला। इंडस्ट्री से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले दो दिन रेट 19 रू से बढ़कर 25 रू तक पहंुच गया है।  फार्मल्डिहाइड महंगा होने से फिल्म फेस प्लाइवुड उत्पादकों पर तुरंत गहरा प्रभाव पड़ा है, और उनकी उत्पादन लागत खर्च बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म फेस प्लाई उत्पादकों ने तत्काल प्रभाव से नए आर्डर लेने से मना कर दिया है।

ऑल इंडिया प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी एआईपीएमए के प्रेसिडेंट श्री देवेंद्र चावला ने बताया कि फॉर्मल्डिहाइड, प्लाइवुड मैन्युफैक्चरिंग के लिए बुनियादी कच्चा माल है। इस आदेश के कारण कुछ ही दिनों में कीमत 6 रुपये बढ़ गई है। हम इसके निर्माताओं को सहयोग करने के लिए तीन बातों पर ध्यान देंगे, पहला एनजीटी से पर्यावरण अनुपाल  के लिए सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ समय की मांग करेंगे। दूसरा हम फॉर्मल्डिहाइड निर्माताओं के साथ इस समस्या का समाधान चाहते हैं इसलिए वे कीमत के मामले में हमारा सहयोग करें और कालाबाजारी ना करें। और तीसरा, अगर यह हमारे उत्पादन को प्रभावित करता है तो हम उत्पाद की कीमत बढ़ाने पर विचार करेंगे। इस आदेश से हरियाणा में कुछ को छोड़कर ज्यादातर इकाइयां प्रभावित होंगी। इससे पूरा देश प्रभावित होगा।

श्री नरेश तिवारी, चेयरमैन, एआईपीएमए ने बताया कि इस आदेश से फिल्म फेस प्लाई और लैमिनेट उद्योग बहुत प्रभावित होगा, क्योंकि यह उनके लिए जरूरी कच्चा माल है। हमें अभी दो उपाय पर काम करना होगा, पहला सरकार से अपनी समस्याओं के निदान के लिए अपील करें, और दूसरा अपने उत्पाद की कीमतें बढ़ाएं। एक अनुमान के मुताबिक, फिल्म फेस प्लाइवुड की कीमत में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी। लैमिनेट, पार्टिकल बोर्ड और एमडीएफ भी इसी तरह प्रभावित होंगे, इसलिए उत्पाद की कीमत बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

हरियाणा प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एचपीएमए) के अध्यक्ष श्री जेके बिहानी कहते हैं कि  इसका सीधा असर फैक्ट्री के कामकाज और फॉर्मल्डिहाइड की कीमतों पर पड़ेगा क्योंकि राज्य सरकार का पिछला आदेश अब अप्रभावी हो गया है। कुछ दिन पहले फॉर्मल्डिहाइड 19 रुपये था जो 25 रुपये तक पहुंच गया है। अगर केमिकल की उपलब्धता कम होगी तो प्लाइवुड का उत्पादन भी प्रभावित होगा और उनकी भी कीमत बढ़ जाएगी। मैं इंडस्ट्री के लोगों से अपील करना चाहूंगा कि पैनिक खरीदारी न करें, और ब्लैकमेलिंग ना करें। आगे जो होगा वह सबके लिए होगा क्योंकि मामला अभी कोर्ट में है।

मेट्रो प्लाइवुड ग्रुप के एमडी श्री बिमल चोपड़ा ने कहा कि आदेश का असर तुरंत फॉर्मल्डिहाइड की कीमत पर दिखाई दे रहा है जो 19 रुपये था वह सिर्फ दो दिनों में 25 रुपये तक पहुंच गया है और लगता है जल्द ही यह 30 रुपये भी हो जाएगा। फॉर्मल्डिहाइड के कारण पूरे देश में उद्योग में केमिकल की अनुपलब्धता के कारण कामकाज में दिक्क्तें पैदा हो रही है।

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