रफ्तार पकड़ने के लिए अभी व्यवसाय में पूंजी लगाना जरूरी

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मई का महीना काफी क्रूर और सुस्त रहा। इसमें कोविड के घातक बार के चलते व्यवसाय के साथ साथ जानमाल का भी काफी नुकसान हुआ। इसने एक बार फिर हमारी योजनाओं को चौपट करते हुए केवल दर्द, बेरोजगारी और संकट पैदा किया। वुड पैनल इंडस्ट्री के लगभग सभी सेक्टर में मनी फ्लो बुरी तरह प्रभावित रहा, क्योंकि मई में शायद ही कुछ हलचल देखने को मिली। मई में काम लगभग 30 फीसदी रहा और इस एडिटोरियल को लिखते समय 45 फीसदी के साथ, पेमेंट की स्थिति सामान्य से आधे पर है जबकि सभी प्रोडक्ट केटेगरी में ऑर्डर 60 फीसदी देखा जा रहा हैं।

एमडीएफ और पार्टिकल बोर्ड जैसे तेजी से बिक़ने वाले आइटम में भी सुस्ती देखी जा रही है। पहले से जारी प्रोजेट चल रहे हैं लेकिन कोई नया काम नहीं आने से सुस्ती बरकरार है। इस बीच कच्चे माल में टिम्बर की कीमतें स्थिर होने से थोड़ी नरमी महसुस की जा रही है। क्राफ्ट पेपर और बेस पेपर में नरमी ने एचपीएल मैन्युफैक्चरर्स को थोड़ी राहत दी है, लेकिन मेलामाइन और फॉर्मल्डिहाइड; लेमिनेट, प्लाईवुड और पार्टिकल बोर्ड के मैन्युफैक्चरर्स का खेल खराब रहा है। कच्चे माल की सप्लाई अभी स्थिर है, लेकिन यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि बाजार कब रफ्तार पकड़ेगा। अगस्त के मध्य तक स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।

जुलाई के महीने में विशेष रूप से दूसरे भाग से तेजी पकड़ने की उम्मीद है। दक्षिण भारत के बाजार खुलने से डिमांड में तेजी आएगी जिससे उद्योगों में पेमेंट साईकल ठीक होने में मदद मिलेगी। अभी पूरा वैल्यू चेन और प्रीमियम रिटेल प्रभावित है, इसलिए सभी स्टेकहोल्डर के लिए मार्जिन फ्रंट पर भारी दबाव है। डेकोरेटिव विनियर सेगमेंट बहुत धीरे धीरे रफ्तार पकड़ रहा है, जबकि प्रीमियम लेमिनेट सेगमेंट में जुलाई-अगस्त में तेजी आने की उम्मीद है।

जून में डिमांड सामान्य के 55 से 60 फीसदी के साथ प्लाइवुड निर्माता, लेमिनेट जो डिजाइन और रेन्ज ड्रिवेन होते है, की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। लाइनर लेमिनेट की मांग भी सामान्य का 60 से 70 फीसदी पर है, लेकिन उम्मीद है जुलाई के मध्य तक सामान्य होंगी। कमजोर मांग और क्राफ्ट की कम कीमतों के कारण लाइनर लेमिनेट की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं। अगस्त के मध्य तक पेमेंट और डिमांड दोनों दबाव में ही रहने की उम्मीद है। मेलामाइन और बेस पेपर की कीमतें भी स्थिर हैं इसलिए कच्चे माल के मोर्चे पर एचपीएल में बैलेंस बना रहने का संकेत है।

फेस विनियर में अभी तंगी है, लेकिन कई फैक्ट्रियां अच्छे स्टॉक के साथ बैठी हैं, इसलिए कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है। अप्रैल से पहले म्यांमार, इंडोनेशिया और गेबॉन से सप्लाई अच्छी थी,  इसलिए मौजूदा बाजार में नरमी है। कुल मिलाकर, उम्मीद है कि जुलाई के मध्य में डिमांडवापस आ जाएगी लेकिन मुझे लगता है कुछ केटेगरी में थोड़ी और देरी होगी। पेमेंट हासिल करना कठिन है, जबकि कच्चे माल के सप्लायर से पेमेंट के लिए काफी दबाव के चलते मीडियम सेगमेंट के निर्माताओं के साथ-साथ वितरकों को उधार लेने और वर्किंग कैपिटल में पैसा लगाने को मजबूर कर रहा है। जो लोग इस मुश्किल हालत में भी निवेश करने का साहस करेंगे, उन्हें निश्चित रूप से बाद में फायदा मिलेगा। यह समय फ्यूल टैंक को फिर से भरने, और तेजी पकड़ने के लिए पूंजी लगाने का है क्योंकि कोविड 2.0 ने हमारी मंजिल को काफी दूर धकेल दिया है। सुरक्षित रहे, आत्मविश्वास से भरपूर स्पष्ट इरादे के साथ आगे बढ़ें, और पढ़ते रहंे।

प्रगत द्विवेदी

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