रियल टच लेमिनेट कर रही 2 लाख शीट प्रति महीने उत्पादन क्षमता का विस्तार . श्री कांति पटेल

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मोरबी, गुजरात के सबसे पुराने प्लेयर्स और सम्मानित ब्रांडों में से एक रंगोली लेमिनेट्स प्राइवेट लिमिटेड का एक ब्रांड, रियल टच लेमिनेट, घरेलू बाजार में उपस्थिति बढ़ाने के साथ-साथ एक्सपोर्ट मार्केट को ध्यान में रखते हुए दो नए प्रेस लगाकर अपने फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता में विस्तार करने जा रही है। उनका मानना ै कि स्टॉक प्रबंधन की जम्मेदारी वितरकों पर स्थानांतरित हो रही है, इसलिए उन्हें इन बदलते समय में क्रेडिट कम कर निवेश को बढ़ावा देना होगा। प्लाई रिपोर्टर ने कंपनी के निदेशक श्री कांति पटेल से उनके विस्तार योजना और उद्योग के बदलते परिदृश्य पर बात की। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश।

प्र. जब से आपने काम शुरू किया और आज के समय में आप क्या बदलाव देखते हैं?

उद्योग में प्रतिस्पर्धा को छोड़कर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है; जिसके चलते रेट नहीं बढ़ा पाने के कारण मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव् पड़ रहा है। आज, यदि कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, तब भी लोग तैयार उत्पादों की कीमत में वृद्धि करके हाई इनपुट कॉस्ट को ग्राहकों को पारित नहीं करना चाहते और कीमत कम रखने के तरीके तलाश रहे हैं। कच्चे माल के दाम बढ़ने के अनुसार वास्तव में उत्पाद की कीमत नहीं बढ़ी है।

प्र. यदि पिछले 20 वर्षों को तीन भागों में बाटें तो इंडस्ट्री में कीमतों में अबतक कितना अंतर आया है?

वर्ष 2001 में 1 मिमी लेमिनेट की कीमत लगभग 411 रुपये थी, जब फिनोल की कीमत केवल 32 रुपये थी। वर्ष 2010 में 1 मिमी की कीमत लगभग 600 थी और फिनोल की कीमत 60 से 70 रुपये और मेलामाइन की कीमत 80 से 85 रुपये थी। आज फिनोल और मेलामाइन की कीमतें क्रमशः 120 और 220 रुपये रुपये हैं, जो बहुत अधिक है; इसके अनुसार लेमिनेट की कीमत में वृद्धि नहीं हुई। इसलिए, सबसे बड़ा बदलाव लेमिनेट इंडस्ट्री में मार्जिन में भारी कमी का आना है।

प्र. भारत में लैमिनेट सेगमेंट में डिज़ाइन में आपने क्या बदलाव देखें?

चीन के आने से उनकी कम कीमत वाले मेटेरियल के साथ डिजाइन इनोवेशन को बढ़ावा मिला, लेकिन इसमें ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। यह सिर्फ एक फोल्डर से दूसरे फोल्डर में ट्रांसफर हुआ। यूरोपीय डिजाइन के साथ ऐसा नहीं है, या तो उनके एकाधिकार के साथ या एकाधिकार नहीं भी है तो भी ये डिजाइन लंबे समय तक बने रहते हैं।

बिक्री के लिए, अलग-अलग थिकनेस में फ़ोल्डर्स होना सही है। मल्टी फोल्डर्स का कांसेप्ट समय की मांग है; अन्यथा फैक्ट्री के मालिक अपने उत्पाद नहीं बेच पाएंगे। अगर रेंज नहीं है तो डिस्ट्रीब्यूटर्स को इस प्रतिस्पर्धी बाजार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

प्र. रियल टच एक प्रतिष्ठित पुराना ब्रांड है, इससे आपको क्या फायदा मिलता है?

हमारे पास विशाल रेंज होने के अलावा ऐसा कोई फायदा नहीं है। पुराने डिस्ट्रीब्यूटर होने के कारण हमें रेट और इसके रियलाइजेशन में कोई दिक्कत नहीं होती है।

प्र. रियल टच का असर पहले उत्तरी क्षेत्र में, खासकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब आदि में भी बेहतर था। यह अब कुछ हद तक कमजोर पड़ा है, ऐसा क्यों?

प्राइस रियलाइजेशन के मामले में बाजार की ताकत अब कमजोर हो गई है। नए आए प्लेयर्स बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहे हैं। तदनुसार, वे रेट भी कम रखते हैं जो एकअस्वास्थ्यकर प्रतिस्पर्धा पैदा करता है। अगर हम उस रास्ते पर चलेंगे तो हमें जीरो मार्जिन पर काम करना होगा और बाद में हमारा अस्तित्व दांव पर लग जाएगा।

प्र. क्या यही कारण है कि आप एक्सपैंशन कर रहे हैं?

ऐसा नहीं है, हम एक्सपैंशन इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमारी एक फैक्ट्री पुरानी हो गई है और अधिकांश ऑपरेशन मैनुअल हैं। एक्सपैंशन के साथ हम इसके ऑपरेशन को एडवांस कर रहे हैं और बड़े एरिया में हमें अधिक प्रेस लगाने के साथ साथ लॉजिस्टिक और स्टॉक के रखरखाव में आसानी होगी।

प्र. अभी उत्पादन क्षमता क्या है; और उपग्रडेशन/एक्सपैंशन के बाद क्या होगी?

पुरानी फैसिलिटी में अभी उत्पादन क्षमता लगभग 90,000 शीट है जो एक्सपैंशन के बाद तकरीबन 3 लाख शीट प्रति माह से अधिक हो जाएगी।

प्र. एक्सपैंशन के बाद बाजार बढ़ाने की रणनीति क्या होगी?

घरेलू बाजार में फुटपिं्रट बढ़ाने के साथ ही हम निर्यात पर भी ध्यान देंगे। मुख्य रूप से निर्यात को टारगेट करते हुए 10ग4.25 फीट के लिए नया प्रेस स्थापित किया जा रहा है। अभी हमारे प्रोडक्ट रेंज तीन फ़ोल्डरों के माध्यम से पेश की जा रही है, और मुझे लगता यदि इन फ़ोल्डरों से ही बिक्री अच्छी होगी, तो नए फ़ोल्डर की कोई जरूरत नहीं होगी। लेकिन, जैसा कि बाजार 0.92 मिमी जैसे अलग अलग थिकनेस वाले उत्पादों के नई रेंज के साथ बदल रहा है, और यदि हमारी बिक्री इसके साथ कवर नहीं होती है, तो हम 0.92 मिमी की मैन्युफैक्चरिंग भी करेंगे और भविष्य में एक नया फ़ोल्डर आ सकता है।

प्र. एक पुराने और प्रतिष्ठित प्लेयर होने के नाते, क्या आपको नहीं लगता कि लैमिनेट में एक स्टैण्डर्ड थिकनेस होनी चाहिए?

मैं हमेशा स्टैण्डर्ड थिकनेस से हो रहे डेविएशन से असहमत हूं। 0.92 मिमी क्यों आया? यह 1 मिमी सेगमेंट को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन हम उन्हें कुछ नहीं कह सकते। हमने इस थिकनेस में कभी उत्पादन नहीं किया है, लेकिन अगर हमारी सेल प्रभावित होती है, तो हम 0.92 मिमी में भी आएंगे। 0.8 मिमी थिकनेस, ग्रामीण और अन्य टियर 2 और 3 शहरों के लिए स्टैण्डर्ड है। यदि कोई लागत प्रभावी उत्पाद के लिए पूछता है तो उनके लिए 0.8 मिमी अच्छा है। केवल 1 मिमी से 50 रुपये कम कीमत के साथ 0.92 मिमी की पेशकश करना तर्कसंगत नहीं लगता। यह साजिश भी है क्योंकि रिटेलर अंडर थिकनेस मेटेरियल देकर इसे 1 मिमी के रूप में बेच रहे हैं।

घरेलू बाजार में फुटपिं्रट बढ़ाने के साथ ही हम निर्यात पर भी ध्यान देंगे। मुख्य रूप से निर्यात को टारगेट करते हुए 10ग4.25 फीट के लिए नया प्रेस स्थापित किया जा रहा है। अभी हमारे प्रोडक्ट रेंज तीन फ़ोल्डरों के माध्यम से पेश की जा रही है, और मुझे लगता यदि इन फ़ोल्डरों से ही बिक्री अच्छी होगी, तो नए फ़ोल्डर की कोई जरूरत नहीं होगी। लेकिन, जैसा कि बाजार 0.92 मिमी जैसे अलग अलग थिकनेस वाले उत्पादों के नई रेंज के साथ बदल रहा है।

प्र. किसी फैक्ट्री के लिए मल्टी फोल्डर कॉन्सेप्ट सही है या गलत?

बिक्री के लिए, अलग-अलग थिकनेस में फ़ोल्डर्स होना सही है। मल्टी फोल्डर्स का कांसेप्ट समय की मांग है; अन्यथा फैक्ट्री के मालिक अपने उत्पाद नहीं बेच पाएंगे। अगररेंज नहीं है तो डिस्ट्रीब्यूटर्स को इस प्रतिस्पर्धी बाजार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

प्र. क्या आप सेलिंग मॉडल और डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ लेन देन में कोई बदलाव देखते हैं?

अगर कोई कंपनी कैश में काम नहीं करेगी, तो उसे आने वाले समय में घाटा उठाना पड़ेगा। बदलते समय के साथ डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपने स्टॉक मैनेजमेंट को नकद खरीद-बिक्री में स्थानांतरित करना होगा और इसके लिए निवेश करना होगा। कंपनी 50 रुपये प्रति शीट का निश्चित मार्जिन रखने को तैयार है। इस तरह फैक्ट्री मालिकों की देनदारी के साथ स्टॉक इन्वेंट्री की पुरानी प्रथाएं आने वाले समय में अस्तित्व में नहीं रहेंगी। यही कारण है कि हम छोटे कैटलॉग लेकर आए हैं, जो वजन में हल्के हैं और इसमें सीमित संख्या में ज्यादा से ज्यादा 150 एसकेयू होते हैं। 400 टुकड़ों वाले भारी कैटलॉग में डिस्ट्रीब्यूटर रुचि नहीं लेते हैं। हमारे जैसे एक प्रेस वाले प्लेयर के लिए दूर दूर में स्टॉक का रख रखाव मुश्किल है।
 

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