फार्मल्डिहाइड की कमी ने लैमिनेट-प्लाइवुड निर्माताओं का बिगाड़ा गणित

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आश्चर्यजनक रूप से सितंबर महीने के अंतिम सप्ताह में हरियाणा में फार्मल्डिहाइड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का तत्काल बंद हो जाना, डेकोरेटिव लेमिनेट, प्लाइवुड और पैनल निर्माताओं के बीच एक खलबली पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा-पंजाब उच्च न्यायालय ने फार्मल्डिहाइड\ प्लांट को फिर से खोलने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया, जो प्रदूषण विभाग के आदेश के बाद बंद हो गए थे। उद्योग के सूत्रों का कहना है कि आदेश के अनुसार, 10 फार्मल्डिहाइड प्लांट के संचालन को तत्काल बंद कर दिया गया था, जिससे उत्तर भारत के निर्माताओं में खलबली मच गई। विभिन्न फार्मल्डिहाइड निर्माताओं द्वारा की गई मूल्य वृद्धि की घोषणाओं के बाद यमुना नगर स्थित लेमिनेट और प्लाइवुड उत्पादकों के बीच काफी दहशत है।

आजकल बाजार में, फार्मल्डिहाइड की कीमतें कथित रूप से 22 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं, और इसमें और वृद्धि की उम्मीद है। इसके चलते लेमिनेट उत्पादक स्पष्ट रूप से अधिक प्रभावित हैं, क्योंकि यह मूल्य वृद्धि उनके इनपुट कॉस्ट पर बहुत अधिक प्रभाव डालेगी। इसका तत्काल प्रभाव लाइनर और डोर स्किन लेमिनेट्स पर दिखाई देगा क्योंकि इसकी कीमतें बाजार में बहुत अधिक प्रतिस्पर्धी हैं। निर्माता लाइनर लेमिनेट की इनपुट कॉस्ट में 15 रुपये प्रति शीट की बढ़ोतरी देख रहे है, जो आगे और बढ़ेगी क्योंकि कच्चे माल की कीमतें और बढ़ने की उम्मीद है।

कच्चे माल की कीमत अचानक बढ़ने के कारण प्लाइवुड उत्पादकों ने भी तैयार माल की बढ़ी हुई लागत के चलते 18 मिमी के प्लाइवुड पर 1.5 से 2 रूपए प्रति वर्ग फुटबढाने पर विचार कर रहे है। हालांकि उद्योग इस तरह मूल्य वृद्धि के लिए कुछ कार्टेल को दोषी ठहराता है और अन्य को घबराहट से बचने की सलाह देता है। लेमिनेट्स और प्लाइवुड निर्माताओं का एक वर्ग मेटेरियल की इनपुट कॉस्ट में इस वृद्धि को पूरा करने के लिए तैयार मालकी कीमतों में वृद्धि करने की वकालत करता है।

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